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23 January 2019

भारतीय नौसेना ने सबसे बड़ा तटीय रक्षा अभ्यास शुरू किया

भारतीय नौसेना ने 22 जनवरी 2019 को "26/11" हमले के दस साल बाद अपने सबसे बड़े तटीय रक्षा अभ्यास शुरू किया है. इस अभ्यास का कोडनेम ‘सी विजिल 2019’ है. यह दो दिवसीय रक्षा अभ्यास हैं. इसका लक्ष्य समुद्री रास्ते के जरिए देशद्रोही तत्वों द्वारा यहां के क्षेत्रों और नागरिकों पर किसी भी तरह के हमले को नाकाम करने के लिए देश की तैयारी की समीक्षा करना है. सभी केंद्रीय मंत्रालय और ऐजंसियों के साथ समुद्र तट से सटे 9 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों इसमें हिस्सा ले रहा है. यह अभ्यास समुद्र तट से सटे सभी 13 राज्यों की 7,516 किमी लंबी सीमा पर चलाया जा रहा है. नेवी और कॉस्ट गार्ड ने अकेले 139 पानी के जहाजों की तैनाती की है. इसके अलावा 35 एयरक्राफ्ट, डॉर्नियर्स, हेलिकॉप्टर्स, ड्रोन, पेट्रोल बोट्स, कोस्टल पुलिस फोर्स और सीआईएसएफ शामिल हैं.

भारतीय नौसेना के मुताबिक नौसेना इतिहास में यह अबतक का सबसे बड़ा युद्धाभ्यास है. मछुआरों और तटीय इलाकों में रहने वाले समुदाय भी इसका हिस्सा बने हैं. इस अभ्यास में रक्षा मंत्रालय के अलावा, गृह मंत्रालय, पेट्रोलियन और प्राकृतिक गैस, मत्स्य पालन, कस्टम के अलावा राज्य सरकारें भी शामिल हैं. इस अभ्यास से अलग-अलग मंत्रालयों और सरकारों के बीच तालमेल को भी परखा जाएगा. सी विजिल अभ्यास मुख्यत: इस बात की जांच करेगा कि 26/11 के बाद तटों की रक्षा के लिए उठाए गए कदम आखिर कितने कारगर साबित हुए हैं. सी विजिल के साथ ऑपरेशनल, टेक्निकल और प्रशासनिक ऑडिट भी किया जाएगा, जो हमारी ताकत और कमजोरी के बारे में सही जानकारी देगा. यह पूरे देश की तटीय सुरक्षा का टेस्ट करेगा. यह राष्ट्रीय सुरक्षा को और मजबूत करने में बेहद मदद करेगा.

26/11 हमले के बाद जांच में सामने आया था कि खुफिया एजेंसी और सुरक्षा एजेंसी के बी बेहतर कनेक्टिविटी नहीं होने की वजह से उस हमले के बारे में अधिक जानकारी नहीं जुटाई जा सकी थी. उस समय भी इस तरह की जानकारी मिली थी कि आतंकी समुद्र के रास्ते भारत में घुस सकते हैं. इस घटना के बाद तटीय इलाकों को सुरक्षित बनाने के लिए कई अहम कदम उठाए गए. इसके अलावा सुरक्षा एजेंसी और खुफिया एजेंसी के बीच भी तालमेल को और बेहतर किया गया. सबसे पहले तो करीब 600 करोड़ रुपये की लागत से कॉस्टल सर्विलांस नेटवर्क के 36 रेडार स्टेशन बनाए गए. इनमें 6 लक्ष्द्वीप में, चार अंडमान निकोबार में काम शुरू हो गया है. अगले फेज में 800 करोड़ रुपये की लागत से 38 स्टेशन और स्थापित किए जाएंगे.

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