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23 January 2019

दुनिया के सबसे भरोसेमंद देशों में से एक है भारत: रिपोर्ट

एडलमैन की ट्रस्ट बैरोमीटर-2019 रिपोर्ट के अनुसार, सरकार, कारोबार, एनजीओ और मीडिया के लिहाज़ से भारत दुनिया के सबसे भरोसेमंद देशों में शामिल है. हालांकि, देश के कारोबारी ब्रांड की विश्वसनीयता इनमें सबसे कम है. विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) के वार्षिक सम्मेलन के शुरू होने से पहले 21 जनवरी 2019 को जारी की गई एडलमैन ट्रस्ट बैरोमीटर-2019 रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वैश्विक विश्वसनीयता सूचकांक तीन अंक के मामूली सुधार के साथ 52 अंक पर पहुंच गया है. चीन जागरूक जनता सूचकांक में 79 और सामान्य आबादी के भरोसा सूचकांक में 88 अंकों के साथ शीर्ष पर है. भारत इन श्रेणियों में क्रमश: दूसरे और तीसरे नंबर पर है. 

यह सूचकांक एनजीओ, कारोबार, सरकार और मीडिया में भरोसे के औसत पर आधारित है. यह निष्कर्ष 16 अक्तूबर से लेकर 16 नवंबर, 2018 तक 27 बाजारों में किए गए ऑनलाइन सर्वे पर आधारित है. इनमें 33,000 से अधिक लोगों के जवाब को शामिल किया गया है. प्रत्येक बाजार में मुख्यालय वाली कंपनियों में भरोसे के मामले में स्विट्जरलैंड, जर्मनी और कनाडा की कंपनियां शीर्ष पर हैं. इन देशों के ब्रांड में प्रत्येक का भरोसा अंक 70 है. 69 अंकों के साथ जापान इन देशों के बाद आता है. वहीं, इस मामले में चीन के 41, भारत एवं ब्राजील के 40-40 और मैक्सिको के 36 अंक हैं. 

रिपोर्ट में कहा गया है कि भविष्य को लेकर निराशावाद की भावना बढ़ रही है. सर्वे में शामिल तीन से एक को ही विश्वास है कि अगले पांच वर्षों में विकसित दुनिया में उनका परिवार बेहतर स्थिति में होगा. वहीं, पांच में से एक का मानना है कि सरकार उनके लिए काम कर रही है, जबकि 70 फीसदी इसमें बदलाव चाहते हैं. इसके अलावा 100 फीसदी रोजगार वाले अर्थव्यवस्था में रहने वाले लोगों को भी नौकरी खोने की आशंका अधिक रहती है.

खबरों के विश्वसनीय स्रोतों के मामले में ‘खोज’ और ‘पारंपरिक मीडिया’ सबसे भरोसेमंद हैं. इसे मामले में खोज और पारंपरिक मीडिया के 66 अंक है, जबकि सोशल मीडिया 44 अंकों के साथ भरोसे के मामले में नीचे है. वहीं, 73 फीसदी लोग झूठी सूचना या फर्जी खबरों को हथियार के रूप में इस्तेमाल किए जाने को लेकर चिंतित हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर ‘मेरे नियोक्ता’ एनजीओ, कारोबार, सरकार और मीडिया की तुलना में अधिक विश्वसनीय हैं. एडलमैन के सीईओ और अध्यक्ष रिचर्ड एडलमैन का कहना है कि पिछले दशक में पारंपरिक प्राधिकरण के आंकड़ों और संस्थानों में भरोसे की कमी देखी गई है.

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