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25 January 2019

इसरो ने छात्रों द्वारा तैयार ‘कलामसैट’ और इमेजिंग सैटेलाईट ‘माइक्रोसैट आर’ लॉन्च किया

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 24 जनवरी 2019 को विश्व के सबसे छोटे सैटेलाइट ‘कलामसैट’ को लॉन्च किया. पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल PSLV C-44 के द्वारा कलामसैट और माइक्रो सैट-आर को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से लॉन्च किया गया. कलामसैट की खासियत यह है कि इसे छात्रों ने विकसित किया है. इसके अलावा, माइक्रोसैट-आर की खासियत है कि यह अन्तरिक्ष से पृथ्वी की तस्वीरें लेने में सक्षम है. इसरो की ओर से जारी मिशन की जानकारी के अनुसार, श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से PSLV C-44 के लॉन्चिंग की उल्टी सुचारु रूप से आरंभ की गई. यह इसरो के पीएसएलवी व्हीकल की 46वीं उड़ान है.

कलामसैट दुनिया का सबसे छोटा सैटेलाइट है. कलामसैट सैटेलाइट को भारतीय छात्रों के एक समूह ने तैयार किया है. इस टीम को रिफत शरूक लीड कर रहे थे. शरूक की उम्र 18 साल है और वे तमिलनाडु के पालापत्ती के रहने वाले हैं. इसका नामकरण देश के पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइल मैन के नाम से मशहूर डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर किया गया है. यह नैनोसैटेलाइट 10 सीएम क्यूब के साथ 1.2 किलोग्राम वजनी सैटेलाइट है.
इसको बनाने में कुल 12 लाख रुपए का खर्च आया है. यह दुनिया का सबसे हल्का और पहला 3डी प्रिटेंड सैटेलाइट है. छात्रों द्वारा तैयार किए गए पे-लोड को पीएस-4 में फिट करके अंतरिक्ष भेज दिया जाएगा. कलामसैट इतना छोटा है कि इसे 'फेम्टो' की श्रेणी में रखा गया है. पीएस-4 लॉन्चिंग पैड का वह हिस्सा है जिसमें चौथे चरण का फ्यूल भरा जाता है.

पीएसएलवी-सी44 ने उड़ान भरने के लगभग 14 मिनट बाद इमेजिंग सैटेलाइट माइक्रोसैट आर को 277 किलोमीटर की ऊंचाई पर अलग कर दिया. अलग होने के बाद इसने लगभग 103वें मिनट में 450 किलोमीटर की ऊंचाई पर पहुंचकर काम करना शुरू कर दिया. कलामसैट सैटेलाइट रॉकेट के चौथे चरण को कक्षीय प्लेटफॉर्म के रूप में इस्तेमाल करेगा. रॉकेट ने अपने चौथे चरण में कलामसैट को अत्यधिक ऊंचाई वाली कक्षा में स्थापित कर दिया, जहां से वह परीक्षण कार्यों को अंजाम दे रहा है.

ध्रुवीय उपग्रह लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी), विश्व के सर्वाधिक विश्वसनीय लॉन्चिंग व्हीकलों में से एक है. यह गत 20 वर्षो से भी अधिक समय से अपनी सेवाएं उपलब्ध करा रहा है तथा इसने चंद्रयान-1, मंगल कक्षित्र मिशन, अंतरिक्ष कैप्सूल पुनःप्रापण प्रयोग (स्पेस कैप्सूल रिकवरी एक्सपरिमेंट), भारतीय क्षेत्रीय दिशानिर्देशन उपग्रह प्रणाली (आईआरएनएसएस) आदि जैसे अनेक ऐतिहासिक मिशनों के लिए उपग्रहों का लॉन्च किया है. लॉन्च सेवादाता के रूप में पीएसएलवी कई संगठनों की पहली पसंद है तथा इसने 19 देशों के 40 से अधिक उपग्रहों को लॉन्च किया है. वर्ष 2008 में इसने एक लॉन्च में सर्वाधिक, 10 उपग्रहों को विभिन्न निम्न पृथ्वी कक्षा में स्थापित करने का रिकार्ड बनाया था.

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