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10 January 2019

जीएसटी काउंसिल ने कंपोजिशन स्कीम में बदलाव किया

जीएसटी काउंसिल ने 10 जनवरी 2019 को कंपोजिशन स्कीम को लेकर बड़ा फैसला किया है. ये काउंसिल की 32वी बैठक थी. जीएसटी काउंसिल ने कंपोजिशन स्कीम और जीएसटी की सीमा में कई बदलाव किए हैं. जीएसटी काउंसिल की बैठक में सभी राज्यों के वित्तमंत्री शामिल होते हैं. ये बैठक 10 जनवरी 2019 को दिल्ली में वित्तमंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में हुई. जीएसटी से जुड़े हुए सभी मामलों पर फैसला जीएसटी काउंसिल ही लेती है. पिछली बैठक में 26 चीजों पर टैक्स की दर को कम किया गया था.

जीएसटी काउंसिल ने जीएसटी के दायरे को बढ़ा दिया है. अभी 20 लाख रुपए तक टर्नओवर करने वाले कारोबारी जीएसटी के दायरे में आते हैं. अब 40 लाख टर्नओवर वाले जीएसटी के दायरे में आएंगे. जीएसटी के दायरे में छोटे राज्यों में जो लिमिट 10 लाख थी वो लिमिट 20 लाख रुपए कर दी गई है. इस कारण कई छोटे कारोबारी जीएसटी के दायरे से बाहर हो जाएंगे. इन छोटे कारोबारियों को जीएसटी रजिस्ट्रेशन का झमेला नहीं रहेगा. जीएसटी काउंसिल की इस बैठक में 50 लाख तक का कारोबार करने वाली सर्विस सेक्टर यूनिट को भी कंपोजिशन स्कीम के दायरे में लाया गया है. इन पर 6 फीसदी की दर से टैक्स लगेगा. जीएसटी काउंसिल ने केरल को 2 साल के लिए 1 फीसदी आपदा सेस लगाने की मंजूरी भी दे दी है.

जीएसटी मे सप्लाई और टैक्स रिटर्न्स का रिकॉर्ड को लगातार बनाए रखना किसी भी व्यापारी के लिए एक जटिल काम है. जीएसटी में आने वाली इन्हीं समस्यों को सरल बनाने के लिए सरकार द्वारा कम्पोजीशन स्कीम लागू की गई हैं. सरकार ने छोटे कारोबारियों को राहत देने के लिए कंपोजिशन स्कीम शुरू की है. जीएसटी काउंसिल की बैठक में कंपोजिशन स्कीम की सीमा को 1.5 करोड़ रुपए कर दिया गया है. अभी तक ये सीमा 1 करोड़ रुपए थी. ये नई सीमा 1 अप्रैल 2019 से लागू होगी. इसके अतिरिक्त जीएसटी काउंसिल ने एसएमई को वार्षिक रिटर्न फाइल करने की छूट दे दी है. इसका अर्थ है 1 अप्रैल 2019 से इन कारोबारियों को साल में 1 ही रिटर्न भरना होगा. हालांकि इन छोटे कारोबारियों को हर तिमाही टैक्स भरना होगा. पहले इनको हर तिमाही में रिटर्न भी भरना होता था.

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