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15 January 2019

पहली भारत-मध्य एशिया वार्ता उज़्बेकिस्तान में संपन्न

पहली भारत-मध्य एशिया वार्ता का आयोजन उज्बेकिस्तान स्थित समरकंद में 12-13 जनवरी 2019 को किया गया. इस वार्ता की सह-अध्यक्षता भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज तथा उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री अब्दुलअज़ीज़ कमीलोव द्वारा की गई. भारत और मध्य एशियाई देशों के बीच अपनी तरह की यह पहली राजनयिक स्तर की वार्ता आयोजित की गई. इस राजनयिक वार्ता के साथ भारत सरकार ने मध्य एशियाई देशों के साथ एक नया कूटनीतिक मंच आरंभ किया है. इसमें भारत सरकार मध्य एशियाई देशों, उज्बेकिस्तान, किर्गिज गणराज्य, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और कजाकिस्तान के साथ पहली बार संयुक्त रूप से वार्ता में शामिल हुआ.

उज़्बेकिस्तान में पहली भारत-मध्य एशिया वार्ता में सुषमा स्वराज ने मध्य एशिया के देशों को चाबहार बंदरगाह परियोजना में भाग लेने के लिये आमंत्रित किया. भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भारत-मध्य एशिया विकास समूह विकसित किये जाने के लिए भी सुझाव दिया. सुषमा स्वराज ने अपने भाषण में कहा कि चाबहार बंदरगाह को संयुक्त रूप से भारत और ईरान द्वारा अफगानिस्तान में भारतीय वस्तुओं को उतारने और उन्हें विभिन्न स्थानों पर भेजने के लिये विकसित किया गया है. विदेश मंत्री ने अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2005 में किये गए सभी पाँच मध्य एशियाई देशों कज़ाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज़्बेकिस्तान के दौरों का उल्लेख किया. भारत के साथ हवाई संपर्क बढ़ाने के लिए भी आवश्यकता को रेखांकित किया गया.

भारत-मध्य एशिया संबंध: भारत 1990 के दशक से मध्य-एशियाई गणराज्यों के साथ घनिष्ठ संबंध बनाने की कोशिश कर रहा है. भारत का सभी पाँच देशों के साथ द्विपक्षीय व्यापार दो बिलियन डॉलर से कम है. भारत ने इसके सुधार के लिये चाबहार पोर्ट के माध्यम से वैकल्पिक मार्ग खोजने की कोशिश की है. हालाँकि भौगोलिक रूप से अफगानिस्तान और मध्य एशिया भू-आबद्ध क्षेत्र हैं, इसके बावजूद ऐसे कई तरीके हैं जिनसे भारत, अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देश इस क्षेत्र में कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिये काम कर किया जा सकता है ताकि देशों के बीच व्यापार और वाणिज्य के क्षेत्र में आदान-प्रदान सुनिश्चित हो सके.

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