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04 January 2019

संसद ने निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा (संशोधन) विधेयक को मंजूरी प्रदान की

देश में आठवीं कक्षा तक के छात्रों को योग्यता के आधार पर उत्तीर्ण करने और ‘नो डिटेंशन नीति’ वापस लेने से संबंधित ‘निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (संशोधन) विधयेक 2019’ पर 03 जनवरी 2019 को संसद की मुहर लग गयी. राज्यसभा ने लगभग एक घंटे की चर्चा के बाद वामदलों के वाकआउट के बीच इस विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी. लोकसभा इसे पहले ही मंजूरी दे चुकी है. नये प्रावधानों के तहत राज्यों को पहले की तुलना में अधिक अधिकार दिए गये हैं.

निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा (संशोधन) विधेयक 2019 में प्रावधान किया गया है कि आठवीं कक्षा तक के छात्रों को भी परीक्षा में योग्यता के आधार उत्तीर्ण किया जाएगा. अभी तक की ‘नो डिटेशन नीति’ के अनुसार आठवीं कक्षा तक के छात्रों को अनुत्तीर्ण नहीं किया जा सकता है. नये कानून में किसी को विद्यालय से बाहर करने का प्रावधान नहीं है बल्कि इससे बच्चों में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी तथा बेहतर परिणाम सामने आयेंगे. केन्द्रीय मंत्री द्वारा संसद में बताया गया कि हाल के वर्षों में शिक्षा के बजट में 40 प्रतिशत की वृद्धि की गयी है और यह 82 हजार करोड़ से बढ़कर 1 लाख 15 हजार करोड़ रुपए हो गया है. 

निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा विधेयक, 2009 भारतीय संसद द्वारा वर्ष 2009 में पारित शिक्षा सम्बन्धी एक विधेयक है. इस विधेयक के पास होने से बच्चों को मुफ़्त और अनिवार्य शिक्षा का मौलिक अधिकार मिल गया है. संविधान के अनुच्छेद 45 में 6 से 14 बर्ष तक के बच्चों के लिये अनिवार्य एवं नि:शुल्क शिक्षा की व्यवस्था की गयी है तथा 86 वें संशोधन द्वारा 21 (क) में प्राथमिक शिक्षा को सब नागरिकों का मौलिक अधिकार बना दिया गया है. यह 1 अप्रैल 2010 को जम्मू -कश्मीर को छोड़कर सम्पूर्ण भारत में लागू हुआ.

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