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01 February 2019

रक्षा मंत्रालय ने 40 हज़ार करोड़ रुपये की 6 पनडुब्बियों के निर्माण को मंजूरी प्रदान की

रक्षा मंत्रालय ने 31 जनवरी 2019 को भारतीय नौसेना के लिए 40 हजार करोड़ रुपये की लागत से छह पनडुब्बियों के स्वदेश में निर्माण को मंजूरी प्रदान कर दी है. रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई. रक्षा मंत्रालय की यह परियोजना रणनीतिक साझेदारी मॉडल के तहत पूरी की जाएगी जो विदेशी रक्षा निर्माताओं के साथ मिलकर भारत में चुनिंदा सैन्य प्लेटफॉर्म बनाने के लिए निजी फर्म को जिम्मेदारी देने की व्यवस्था करता है. रणनीतिक साझेदारी मॉडल के तहत लागू होने वाली यह दूसरी परियोजना होगी. नए मॉडल के तहत लागू होने के लिए सरकार की मंजूरी वाली पहली परियोजना 21 हजार करोड़ रुपये की लागत से नौसेना के लिए हेलीकॉप्टर की खरीद की थी.

इस परियोजना को प्रोजेक्ट 75 नाम दिया गया है. इन पनडुब्बियों में एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (एआईपी) होगा, जिससे यह पनडुब्बियां 14 दिन तक जलमग्न रह सकती हैं. इस परियोजना को रणनीतिक साझेदारी मॉडल के तहत मंज़ूरी दी गयी है. इस परियोजना को पूरा होने एक दशक का समय लग सकता है. इस परियोजना के लिए भारतीय रक्षा निर्माता कंपनी विदेशी कंपनी ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर. के साथ मिलकर कार्य करेगी. बैठक में रक्षा खरीद प्रक्रिया 2016 में महत्वपूर्ण बदलावों को भी मंजूरी दी गयी. बैठक में सेना के लिए लगभग 5000 मिलन टैंक रोधी मिसाइलों की खरीद को भी मंजूरी दी गई. 

रक्षा अधिग्रहण परिषद् का गठन सैन्य सामान शीघ्रता से प्राप्त करने के लिए वर्ष 2001 में सरकार द्वारा किया गया था. इसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री द्वारा की जाती है. रक्षा अधिग्रहण परिषद् सैन्य सामान के अधिग्रहण के लिए दिशा-निर्देश भी जारी करता है. इससे पहले सरकार ने अगस्त 2018 में इसी माडल के तहत नौसेना के लिए देश में ही 111 बहुउद्देशीय हेलिकॉप्टर बनाने की मंजूरी दी थी.

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