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21 February 2019

विश्व बैंक, संयुक्त राष्ट्र और सिडबी द्वारा भारत में महिलाओं के लिए आजीविका बॉण्ड की घोषणा

विश्व बैंक, लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) और संयुक्त राष्ट्र की महिला विशेष संस्था यूएन वुमन ने वित्तीय प्रबंधन फर्मों और प्रमुख कॉरपोरेट्स के साथ मिलकर ग्रामीण महिला उद्यमियों को ऋण प्रदान करने हेतु सामाजिक प्रभाव बॉण्ड शुरू करने की घोषणा की है. सिडबी द्वारा लाया गया यह महिला आजीविका बॉण्ड उद्यमी महिलाओं को 3 प्रतिशत पर एक वार्षिक कूपन प्रदान करेगा जिसका कार्यकाल पाँच वर्ष का होगा. इस बॉण्ड के ज़रिये जुटाई जाने वाली निधि (लगभग 300 करोड़ रुपए) आगामी
तीन महीनों के अंतर्गत कई चरणों में जारी की जाएगी. प्राप्त निधि को सिडबी के माध्यम से लघु और मध्यम महिला उद्यमियों को सूक्ष्म वित्त उद्योग के माध्यम से दिया जायेगा.

सिडबी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक के अनुसार, महिला उद्यमियों को दिये जाने वाले ऋण की सीमा 13 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी तथा इस बॉण्ड की कीमत 50,000 रुपये से 3 लाख रुपये तक होगा. बोर्ड में शामिल कुछ वित्तीय प्रबंधन फर्मों में सेंट्रम वेल्थ, आस्क वेल्थ एडवाइज़र्स, एंबिट कैपिटल और आदित्य बिड़ला कैपिटल शामिल हैं. ये पहले से ही व्यक्तिगत स्तर पर उच्च नेटवर्थ तक पहुँच चुके हैं और धन जुटाने के लिये निवेशकों को प्रभावित कर रहे हैं. इसके अलावा पाँच कंपनियों, टाटा ग्रुप-टाटा कम्युनिकेशंस, टाटा केमिकल्स, टाटा ट्रेंट, वोल्टास और टाइटन ने भी इसमें निवेश करने में रुचि दिखाई है.

सामाजिक प्रभाव बॉण्ड: सामाजिक प्रभाव बॉण्ड सार्वजनिक क्षेत्र या प्रशासकीय प्राधिकरण के साथ किया गया एक अनुबंध है, जिसके तहत वह कुछ क्षेत्रों में बेहतर सामाजिक परिणामों के लिये भुगतान तथा निवेशकों को प्राप्त बचत में भागीदारी प्रदान करता है. इस फंड का उपयोग कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, सेवाओं और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में व्यक्तिगत महिला उद्यमियों को ऋण देने के लिये किया जाएगा. इसमें पुनर्भुगतान और निवेश पर वापसी वांछित सामाजिक परिणामों की उपलब्धि पर निर्भर करती है, यदि उद्देश्य प्राप्त नहीं होता है, तो निवेशकों को रिटर्न या मूलधन में से कुछ भी प्राप्त नही होता है.

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