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04 February 2019

राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह का शुभारंभ

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय 04 फरवरी 2019 को 30 वें राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह का शुभारंभ किया. राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह' के तहत आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से आमजन को यातायात नियमों की आधारभूत जानकारी मिलती है. आकस्मिक कारक के रूप में सड़क दुर्घटनाओं के विश्लेषण से पता चलता है कि कुल सड़क दुर्घटनाओं में 78.7 प्रतिशत चालकों की गलती से होती हैं. इस गलती के पीछे शराब/मादक पदार्थों का इस्‍तेमाल, वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात करना, वाहनों में जरुरत से अधिक भीड़ होना, वैध गति से अधिक तेज़ गाड़ी चलाना और थकान आदि होना है.

शहरीकरण और सड़क यातायात बढ़ने के कारण सड़कों पर सुरक्षा के मुद्दे और इनके समाधानों पर गंभीरता से विचार हो रहा है. दुनिया में भारत में सबसे अधिक लोग सड़क दुर्घटनाओं में मर रहे हैं और इस कारण यह मुद्दा और भी गंभीर बन गया है. वर्ष 2011 में 4.97 लाख सड़क दुर्घटनाओं में 1.42 लाख से अधिक लोगों की जानें गई. यह संख्‍या भारत में प्रति मिनट एक सड़क दुर्घटना और प्रत्‍येक चार मिनट में सड़क दुर्घटना से होने वाली मौत का आंकड़ा दर्शाती है. वर्ष 2012 में इन आंकड़ों में कुछ कमी आई, जिसमें 4.90 लाख सड़क दुर्घटनाओं में 1.38 लाख लोगों की जानें गईं. फिर भी यह संख्‍या विचलित करने वाली है.

आकस्मिक कारक के रूप में सड़क दुर्घटनाओं के विश्लेषण से पता चलता है कि कुल सड़क दुर्घटनाओं में 78.7 प्रतिशत चालकों की गलती से होती हैं. इस गलती के पीछे शराब/मादक पदार्थों का इस्‍तेमाल, वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात करना, वाहनों में जरुरत से अधिक भीड़ होना, वैध गति से अधिक तेज़ गाड़ी चलाना और थकान आदि होना है. चालकों की गलती को लगभग 80 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाओं का जिम्‍मेदार पाया गया है, इसलिए उन्‍हें जागरूक बनाना और यह महसूस कराना आवश्‍यक है कि जब वे क़ानून/उपायों का उल्‍लंघन करते हैं तो वे सड़कों पर हत्‍यारे बन जाते हैं.

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