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11 February 2019

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने लद्दाख को पृथक मंडल घोषित किया

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने हाल ही में लद्दाख को कश्मीर से पृथक करते हुए उसे एक अलग डिवीज़न अथवा मंडल घोषित किया है. इस घोषणा से अब राज्य में तीन प्रशासनिक इकाइयाँ जम्मू, कश्मीर और लद्दाख कार्यरत हो जायेंगी. राज्य प्रशासन की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि लद्दाख के लिये प्रशासकीय व राजस्व विभाग भी अलग से बनाया जायेगा जिसके लिए लेह में मुख्यालय बनाया जायेगा. इसके अतिरिक्त योजना के विकास एवं निगरानी के लिये मुख्य सचिव के नेतृत्व में एक समिति भी बनाई गई है. यह समिति नवगठित लद्दाख मंडल में विभिन्न विभागों के मंडल स्तर के पदों को चिन्हित करने के अलावा स्टाफ की व्यवस्था, ज़िम्मेदारियों और कार्यालय हेतु जगह भी चिन्हित करेगी.

इस फैसले से कश्मीर घाटी 15,948 वर्ग किमी. क्षेत्रफल के साथ सबसे छोटा डिवीज़न उसके बाद जम्मू डिवीज़न जिसका क्षेत्रफल 26,293 वर्ग किमी. होगा जबकि लद्दाख 86,909 वर्ग किमी. के साथ सबसे बड़ा डिवीज़न बन जाएगा. लद्दाख के कारगिल और लेह ज़िलों में पहले से ही स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था के लिये अलग पहाड़ी विकास परिषद हैं. सरकारी आदेश के अनुसार, लद्दाख को अलग डिवीज़न बनाए जाने का फैसला लद्दाख के लोगों की प्रशासन व विकासीय आकांक्षाओं को पूरा करने में दूरगामी साबित होगा. राज्य प्रशासन के मुताबिक, लेह व कारगिल जैसे जिलों के चलते लद्दाख सर्दियों के दौरान लगभग छह माह तक शेष भारत से कटा रहता है. इस दौरान सिर्फ लेह में हवाई जहाज़ से ही पहुँचा जा सकता है और इस कारण देश के अन्य भागों से कई लोग चाहकर भी सर्दियों के दौरान लद्दाख नहीं पहुँच पाते हैं. लद्दाख विशिष्ट भौगोलिक, सामाजिक, सांस्कृतिक पहचान और राजधानी से दूरी के मद्देनज़र विशेष व्यवहार किये जाने का हकदार है. इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए ही लद्दाख के लिये एक अलग प्रशासकीय व राजस्व विभाग बनाने का फैसला किया गया है.

जम्मू कश्मीर लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद अधिनियम 1997 के तहत ही लेह व कारगिल के लिये परिषदों का गठन किया गया है. इन परिषदों को वित्तीय, प्रशासकीय और विधायी तौर पर मज़बूत बनाने के लिये ही एलएएचडीसी अधिनियम 1997 को वर्ष 2018 में संशोधित किया गया है. लद्दाख में जनसंख्या का घनत्व बहुत ही कम है और यह अत्यंत विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाला क्षेत्र है इसलिए उस क्षेत्र को इस प्रकार का महत्व देना बेहतर कदम साबित हो सकता है.

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