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20 March 2019

यूनेस्को द्वारा वर्ल्ड वॉटर डेवलपमेंट रिपोर्ट 2019 जारी की गई

संयुक्त राष्ट्र की ईकाई यूनेस्को द्वारा 19 मार्च 2019 को वर्ल्ड वॉटर डेवलपमेंट रिपोर्ट (अंतरराष्ट्रीय विश्व जल विकास रिपोर्ट) जारी की गई. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्व के लगभग 2.1 बिलियन लोगों को अस्वच्छ पानी पीने पर मजबूर होना पड़ रहा है. यूनेस्को द्वारा जारी रिपोर्ट का शीर्षक है – Leaving No One Behind. यूनेस्को द्वारा जारी इस रिपोर्ट के अनुसार विश्व भर में 4.3 बिलियन लोगों के पास स्वच्छ पानी की सुविधा नहीं है. रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षित, सस्ता और विश्वसनीय पेयजल तथा स्वच्छता सेवाओं तक पहुँच सभी के मूलभूत अधिकार हैं. अमीर लोगों को कम कीमत पर बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं जबकि गरीब लोग स्वच्छ पानी के लिए अधिक कीमत चुका रहे हैं. विश्व के एक तिहाई लोग ग्रामीण क्षेत्रों में बेहद गरीबी की हालत में रह रहे हैं. यह लोग खाद्य असुरक्षा के साथ-साथ कुपोषण से भी जूझ रहे हैं.

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2017 के अंत तक, अभूतपूर्व 68.5 मिलियन लोग संघर्ष, उत्पीड़न एवं मानवाधिकारों के उल्लंघन के परिणामस्वरूप अपने घरों से जबरन विस्थापित हो गए हैं. इसके चलते उन्हें स्वच्छ पानी की सुविधाओं से वंचित होना पड़ा है. इसके अलावा 18.8 मिलियन लोग अचानक शुरू हुई आपदाओं के चलते विस्थापित हुए – इसके लिए जलवायु परिवर्तन एक प्रबल संभावना है. बड़ी संख्या में लोगों के विस्थापन से प्राकृतिक संसाधनों पर गहरा असर पड़ा है. इससे उस स्थान की वास्तविक जनसंख्या तथा विस्थापन के बाद आकर बसने वाले लोगों को प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धतता के लिए जूझना पड़ रहा है.

वर्ल्ड वॉटर डेवलपमेंट रिपोर्ट (WWDR) संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी की जाने वाली एक वैश्विक रिपोर्ट है जिसमें विश्व में पानी की उपलब्धता तथा इसकी स्थिति के बारे में जानकारी दी जाती है. इसमें स्थानीय समस्याओं, पानी से जूझ रहे विशेष क्षेत्रों के बारे में जानकारी दी जाती है. डब्ल्यूडब्ल्यूडीआर का विकास, विश्व जल आकलन कार्यक्रम (डब्ल्यूडब्ल्यूएपी) द्वारा समन्वित, संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों और संस्थाओं का संयुक्त प्रयास है, जो संयुक्त राष्ट्र के लिए जल संबंधी कार्यों को करते हैं. इसे पहले प्रति तीन वर्ष में एक बार जारी किया जाता था. सबसे पहले यह रिपोर्ट वर्ष 2003 में जारी की गई , इसके बाद यह 2006, 2009 और 2012 में जारी की गई. इसके बाद 2014 से यह प्रतिवर्ष जारी की जाने लगी है.

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