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01 July 2019

उत्तर प्रदेश में 17 जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल किया गया

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने पिछड़ी जातियों को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है. योगी सरकार ने 17 पिछड़ी जातियों (OBC) को अनुसूचित जातियों (SC) की सूची में शामिल कर दिया है. इन जातियों को अनुसूचित जातियों की लिस्ट में शामिल करने के पीछे योगी सरकार का कहना है कि ये जातियां सामाजिक और आर्थिक रूप से ज्यादा पिछड़ी हुई हैं. अब इन 17 पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र दिया जाएगा. इसके लिए जिला अधिकारियों को इन 17 जातियों के परिवारों को जाति प्रमाण पत्र जारी करने का आदेश दिया गया है.

इस मामले में दिसंबर 2016 को अनुसूचित जाति में शामिल करने से संबंधित शासनादेश जारी किया गया था. इस शासनादेश के खिलाफ डॉ. बीआर आंबेडकर ग्रंथालय एवं जनकल्याण ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की. इस पर कोर्ट ने अग्रिम आदेश तक स्टे दे दिया था. 29 मार्च, 2017 को हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस शासनादेश के तहत कोई भी जाति प्रमाण पत्र जारी किया जाता है तो वह न्यायालय के अंतिम फैसले के अधीन होगा. इसके अनुपालन में प्रमुख सचिव समाज कल्याण मनोज सिंह ने शासनादेश जारी किया है. इसमें कहा गया है कि उच्च न्यायालय, इलाहाबाद द्वारा 29 मार्च, 2017 को पारित आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए परीक्षण के उपरांत सुसंगत अभिलेखों के आधार पर नियमानुसार जाति प्रमाण पत्र जारी किए जाने के लिए आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करें.

वे पिछड़ी जिन्हें अनुसूचित जाति की सूची में शामिल कर लिया गया है, वे हैं - निषाद, बिंद, मल्लाह, केवट, कश्यप, भर, धीवर, बाथम, मछुआरा, प्रजापति, राजभर, कहार, कुम्हार, धीमर, मांझी, तुरहा एवं गौड़. इन पिछड़ी जातियों को अब एससी कैटेगरी की लिस्ट में डाल दिया गया है. सरकार ने जिला अधिकारी को इन 17 जातियों के परिवारों को जाति प्रमाण पत्र जारी करने का आदेश दिया है.

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