मासिक करेंट अफेयर्स

23 July 2019

भारत ने रचा इतिहास, इसरो ने सफलतापूर्वक लाँन्च किया चंद्रयान-2

इसरो ने 22 जुलाई 2019 को आंध्र प्रदेश के श्रीहरीकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से चन्द्रयान-2 को लॉन्च किया. भारत इससे पहले चंद्रयान-2 को 15 जुलाई की सुबह 2:51 बजे लांच करने की तैयारी की थी. लेकिन उस दिन लांचिंग से 56 मिनट पहले रॉकेट में कुछ गड़बड़ी दिखने के कारण अभियान को टाल दिया गया था. वैज्ञानिकों का कहना था कि ऐसे अभियान में देरी स्वीकार्य है, लेकिन खामी नहीं. ऐसे हर अभियान से देश के करोड़ों लोगों की उम्मीद जुड़ी होती है. जरा सी खामी अभियान को खतरे में डाल सकती है. सात सितंबर को जैसे ही चांद की सतह पर चंद्रयान-2 के लैंडर-रोवर कदम रखेंगे, भारत यह उपलब्धि हासिल करने वाला चौथा देश बन जाएगा. अब तक केवल अमेरिका, रूस और चीन ने ही अपने यान चांद पर उतारे हैं.

अमेरिका ने जब चांद की सतह पर मानव भेजने का अभियान पूरा कर लिया था, उसके करीब महीनेभर बाद 15 अगस्त, 1969 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की स्थापना की गई थी. आज भारतीय वैज्ञानिकों ने अपनी मेधा से उस ऊंचाई को छू लिया है कि चंद्रयान-2 के साथ अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने भी अपना पेलोड भेजा है. इसरो ने पूरे अभियान को जितने सटीक तरीके से अंजाम दिया, उसे देखकर कहा जा सकता है कि देर आए, मगर दुरुस्त आए. लांचिंग से लेकर यान के पृथ्वी की कक्षा में पहुंचने तक के 16 मिनट के सफर जितने सटीक तरीके से बीता, वह किसी वैज्ञानिक अभियान के लिए बड़ी उपलब्धि होता है. इसरो ने इस अभियान को उम्मीद से बेहतर बताया है.

चंद्रयान-2 की लांचिंग की जिम्मेदारी इसरो ने अपने सबसे भारी रॉकेट जियोसिंक्रोनस सेटेलाइट लांच व्हीकल-मार्क 3 (जीएसएलवी-एमके 3) को सौंपी थी. 640 टन वजनी इस रॉकेट की लागत 375 करोड़ रुपये है. इसरो ने इसे 'फैट बॉय' (मोटा लड़का) नाम दिया है. वहीं स्थानीय मीडिया ने सुपरहिट फिल्म के नाम पर इसे 'बाहुबली' नाम दिया है. मिशन का सबसे पहला उद्देश्य चांद की सतह पर सुरक्षित उतरना और फिर सतह पर रोबोट रोवर संचालित करना है. इसका मुख्य उद्देश्य चांद की सतह का नक्शा तैयार करना, खनिजों की मौजूदगी का पता लगाना, चंद्रमा के बाहरी वातावरण को स्कैन करना और किसी न किसी रूप में पानी की उपस्थिति का पता लगाना है. इस मिशन एक और उद्देश्य चांद को लेकर हमारी समझ को और बेहतर करना और मानवता को लाभान्वित करने वाली खोज करना है. 

भारत ने इससे पहले चंद्रयान-1 साल 2008 में लॉन्च किया था. यह भी मिशन चाँद पर पानी की खोज में निकला था. भारत ने साल 1960 के दशक में अंतरिक्ष कार्यक्रम शुरू किया था. पृथ्वी से चाँद की औसत दूरी 3, 84, 000 किलोमीटर है. चंद्रयान-2 का लैंडर विक्रम चँद्रमा पर 48वें दिन उतरेगा. और यह यात्रा आज से शुरू हो गई है. चंद्रयान 1 की खोजों को आगे बढ़ाने के लिए चंद्रयान-2 को भेजा गया है. चंद्रयान-1 दवारा खोजे गए पानी के अणुओं के साक्ष्यों के बाद आगे चांद की सतह पर, सतह के नीचे और बाहरी वातावरण में पानी के अणुओं के वितरण की सीमा का अध्ययन करने की जरूरत है. इस मिशन में ऑर्बिटर चांद के आसपास चक्कर लगाएगा, विक्रम लैंडर चांद के दक्षिणी धुव्र के पास सुरक्षित और नियंत्रित लैंडिंग करेगा और प्रज्ञान चांद की सतह पर जाकर प्रयोग करेगा.

No comments:

Post a comment