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01 July 2019

संसद ने विशेष आर्थिक क्षेत्र (संशोधन) अध्यादेश, 2019 को मंजूरी प्रदान की

संसद ने विशेष आर्थिक क्षेत्र (संशोधन) विधेयक, 2019 को मंज़ूरी दे दी है जो उद्योगों को विशेष आर्थिक क्षेत्रों में इकाइयों की स्थापना की अनुमति प्रदान करता है. इस विधेयक ने विशेष आर्थिक क्षेत्र (संशोधन) अध्यादेश 2019 का स्थान लिया है, इस अध्यादेश को मार्च, 2019 में लागू किया गया था. इस विधेयक के द्वारा विशेष आर्थिक क्षेत्र अधिनियम, 2005 में संशोधन किया गया है. यह संशोधन केंद्र सरकार को किसी व्यक्ति या किसी भी संस्था को परिभाषित करने के संबंध में लचीलापन प्रदान करेगा जिसे केंद्र सरकार समय-समय पर अधिसूचित कर सकती है. सरकार का मानना है कि इस संशोधन से SEZ में किये जाने वाले निवेश में भी वृद्धि होगी.

यह विधेयक मार्च 2019 में प्रवर्तित विशेष आर्थिक क्षेत्र (संशोधन) अध्यादेश, 2019 का स्थान लेगा एवं राष्ट्रपति से मंज़ूरी मिलने के बाद कानून बन जाएगा. कानून के अनुसार, एक व्यक्ति, एक हिंदू विभाजित परिवार, एक कंपनी, सहकारी समिति या एक फर्म को ‘व्यक्ति’ की परिभाषा के अंतर्गत आते हैं. वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, यह एक छोटा सा संशोधन है जिसका निवेश, नौकरी और विकास पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा. सरकार का मानना है कि SEZ अधिनियम, 2005 (SEZs Act, 2005) के वर्तमान प्रावधान, व्यापारिक संस्थाओं को विशेष आर्थिक क्षेत्रों में व्यापारिक इकाइयाँ स्थापित स्थापित करने की अनुमति नहीं देते हैं. लेकिन विशेष आर्थिक क्षेत्र (संशोधन) विधेयक, 2019 SEZ में इकाइयाँ स्थापित करने के लिये अनुमति देने पर विचार किया जा सकेगा.

विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ): विशेष आर्थिक क्षेत्र अथवा सेज़ (एसईजेड) उस विशेष रूप से पारिभाषित भौगोलिक क्षेत्र को कहते हैं, जहां से व्यापार, आर्थिक क्रियाकलाप, उत्पादन तथा अन्य व्यावसायिक गतिविधियों को किया जाता है. यह क्षेत्र देश की सीमा के भीतर विशेष आर्थिक नियम कायदों को ध्यान में रखकर व्यावसायिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए विकसित किए जाते हैं. भारत पहला एशियाई देश है, जिसने निर्यात को बढ़ाने के लिए वर्ष 1965 में कांडला में एक विशेष आर्थिक क्षेत्र की स्थापना की थी. इसे निर्यात प्रकिया क्षेत्र (एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग ज़ोन/ईपीजेड) नाम दिया गया था.

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