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30 September 2019

पनडुब्बी INS खंडेरी भारतीय नौसेना में शामिल

केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने 28 सितंबर 2019 को पनडुब्बी INS खंडेरी (INS Khanderi) को भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल कर दिया है. इस पनडुब्बी के निर्माण में पूरे दस साल का समय लगा. इस पनडुब्बी को ढाई साल से अधिक समय तक कई कठोर समुद्री परीक्षणों से गुजरना पड़ा था. यह पनडुब्बी कई आधुनिक तकनीकों से लैस है. इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तथा नेवी प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने पनडुब्बी का निरीक्षण किया. इससे भारतीय नौसेना की समुद्र सीमा की ताकत में और भी ज्यादा इजाफा हो गया है.

पनडुब्बी INS खंडेरी की मुख्य खासियत ये है कि दुश्मनों के लिए इसका पता लगाना आसान नहीं होगा. इसके अतिरिक्त इसकी सबसे अहम खासियत यह है कि यह किसी भी रडार की पकड़ में नहीं आएगी. यह लड़ाई के दौरान पानी में दुश्मन पर सबसे पहले प्रहार करने वाली कलवरी श्रेणी की दूसरी डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बी है. पनडुब्बी खंडेरी का पूरे दो साल तक समुद्र में परीक्षण किया गया उसके बाद अब इसे भारतीय नौसेना में शामिल किया जा रहा है. पनडुब्बी INS खंडेरी अत्याधुनिक तकनीक से लैस है. इस पर टॉरपीडो तथा ऐंटिशिप मिसाइलें तैनात की जाएंगी. ये पानी से पानी और पानी से किसी भी युद्धपोत को ध्वस्त करने की पूरी क्षमता रखती हैं.

इसकी खासियत यह भी है की ये 45 दिनों तक पानी के भीतर रह सकती है. यह पनडुब्बी एक घंटे में 35 किलोमीटर की दूरी तय कर सकती है. INS खंडेरी सागर में 300 मीटर की गहराई तक जा सकती है. INS खंडेरी 67 मीटर लंबी, 6.2 मीटर चौड़ी और 12.3 मीटर की ऊंचाई वाली इसका कुल वजन 1550 टन है. इस पनडुब्बी में 36 से अधिक नौसैनिक रह सकते हैं. पनडुब्बी एक बार पानी में उतर जाने के बाद एक बार में 12,000 किलोमीटर का सफर तय कर सकती है. ये पनडुब्बी पूरी तरह से बैटरी से चलने वाली है. इसमें लंबे समय तक पानी में रहने के लिए 750 किलो की 360 बैटरी लगाई गई हैं. पनडुब्बी INS खंडेरी का नाम महान मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज के खंडेरी दुर्ग के नाम पर रखा गया है. आईएनएस (INS) खंडेरी समुद्र के अंदर पानी में करीब 20 समुद्री मील और पानी के ऊपर करीब 11 समुद्री मील की चाल से चलने में सक्षम है.

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