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02 October 2019

बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने जल-जीवन-हरियाली अभियान का शुभारम्भ किया

बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने गांधी जयंती के अवसर पर पटना के ज्ञान भवन में बहुप्रतीक्षित 'जल-जीवन-हरियाली अभियान' की शुरुआत की. इस दौरान उन्होंने स्कूलों में गांधी कथा वाचन के लिए दो किताबों का भी लोकार्पण किया- बापू की पाती और एक थे बापू. इस अवसर पर उन्‍होंने कहा कि पृथ्‍वी जरूरत को पूरा करती है, लालच को नहीं. उन्‍होंने कहा कि बिहार समेत देश में हो रहे मौसम के बदलाव के पीछे जलवायु परिवर्तन मुख्‍य कारण है. उन्‍होंने कहा कि तालाब, नहर, कुओं, पोखर से अवैध कब्‍जा हटाया जा रहा है. जल को लेकर पुरानी प्रथाओं को पुनर्जीवित करेंगे. चापाकल तक पर ध्‍यान दिया जा रहा है. 

उन्‍होंने जल-जीवन-हरियाली के नामकरण में छिपे उद्देश्‍य को भी बताया. उन्‍होंने कहा कि नाम में जल और हरियाली के बीच जीवन छिपा हुआ है. जल और हरियाली है तो तभी जीवन है. ऐसे में जल और हरियाली को बचाने की जरूरत है. इसके लिए पौधारोपण भी किया जा रहा है. हर सड़क के दोनों किनारों में पौधा लगाने की योजना है और इस पर अमल भी किया जा रहा है. उन्‍होंने कहा कि इस अभियान की औपचारिक शुरुआत पटना में कर दी गई है, प्रदेश के बाकी जिलों में इसे 26 अक्‍टूबर को विधिवत शुरू किया जाएगा. 

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गांधी के विचारों को पर्यावरण सुरक्षा से जोड़ा और पटना के मोहल्लों में जलजमाव की सबसे बड़ी वजह जलवायु परिवर्तन को बताया. उन्होंने कहा कि अचानक हुई बारिश से ऐसे हालात उत्पन्न हो गए. मौसम जिस तरह से बदल रहा है उससे कहीं सूखा तो कहीं अतिवृष्टि हो रही है. बिहार में ताजा हालात की भी यही वजह है. गांधी समागम को लेकर मुख्यमंत्री ने युवा पीढ़ी से गांधी के विचारों को अपनाने की अपील की और कहा कि 10 से 15 फीसद लोगों ने भी गांधी को आत्मसात कर लिया तो देश और समाज बदल जाएगा. अभी तक स्कूलों में गांधी कथा वाचन बच्चों से कराया जाता था, किंतु अब शिक्षक करेंगे. बच्चों को एक-एक वाक्य समझाएंगे.

गांधी की सात नसीहतों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव दीपक कुमार को निर्देश दिया कि इन्हें सचिवालयों, सरकारी भवनों और स्कूलों में इस तरह से लगाया जाए कि कोई मिटा नहीं सके. नीतीश ने आशंका जताई कि मेरे बाद जो लोग सत्ता में आएंगे, वे इन्हें उखाड़ भी सकते हैं. इसलिए गांधी की नसीहतों को इस तरह लगाएं कि कोई मिटा न सके. चंपारण सत्याग्र्रह का उल्लेख करते हुए नीतीश ने कहा कि इसके बाद देश में ऐसी जागृति आई कि 30 वर्षों के भीतर आजादी मिल गई. बिहार ने चंपारण सत्याग्र्रह के सौ साल पूरे होने पर 2017 में देश में पहली बार स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित किया था, जिसमें राष्ट्रपति भी आए थे. उसी दौरान मैंने तय किया था कि गांधी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाएंगे.

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