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13 November 2019

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करतारपुर कॉरिडोर का उद्घाटन किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 09 नवंबर 2019 को करतारपुर कॉरिडोर का उद्घाटन किया. प्रधानमंत्री मोदी ने करतारपुर गलियारे के उद्घाटन के मौके पर गुरुनानक जी के 550 प्रकाशोत्सव के मौके पर 550 रुपये का विशेष स्मारक सिक्का भी जारी किया. प्रधानमंत्री मोदी ने 09 नवंबर 2019 को सिख समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि गुरुनानक देव के 550वें प्रकाश पर्व से पहले करतारपुर कॉरिडोर का उद्घाटन होना बहुत ही खुशी की बात है. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश-उत्सव से पहले, करतारपुर साहिब कॉरिडोर का खुलना हम सभी के लिए दोहरी खुशी लेकर आया है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि गुरु नानक देव सिर्फ सिख पंथ की, भारत की ही धरोहर नहीं बल्कि पूरी मानवता हेतु प्रेरणा पुंज हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन से पहले पंजाब के सुल्‍तानपुर लोधी स्थित बेर साहिब गुरुद्वारा में मत्‍था टेका. पंजाब के मुख्‍यमंत्री अमरिंदर सिंह ने सुल्‍तानपुर लोधी में उनका स्‍वागत किया. पहले जत्‍थे में 575 श्रद्धालु जाएंगे, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी शामिल हैं. पहले ही भारत और पाकिस्तान कॉरिडोर को लेकर एक समझौते पर हस्ताक्षर कर चुके हैं. इस समझौते के तहत भारतीय तीर्थयात्रियों को गुरुद्वारा आने हेतु पाकिस्तान वीज़ा मुक्त प्रवेश देगा. इस समझौते के तहत करीब 5,000 भारतीय श्रद्धालु रोज़ाना गुरुद्वारा दरबार साहिब जा सकेंगे.

पंजाब के गुरदासपुर जिले में करतारपुर कॉरिडोर को डेरा बाबा नानक मंदिर तथा पाकिस्तान के करतारपुर में गुरुद्वारा दरबार साहिब को जोड़ने हेतु बनाया जा रहा है. पाकिस्तान कॉरिडोर का निर्माण भारतीय सीमा से लेकर गुरुद्वारा दरबार साहिब तक कर रहा है. वहीं भारत द्वारा कॉरिडोर का निर्माण गुरदासपुर में डेरा बाबा नानक से सीमा तक बनाया जा रहा है. दो धार्मिक तीर्थस्थलों के बीच यह कॉरिडोर तीर्थयात्रियों के वीजा फ्री आवागमन को सक्षम करेगा. गुरु नानक देव द्वारा करतारपुर साहिब गुरुद्वारा को साल 1522 में स्थापित किया गया था. करतारपुर कॉरिडोर सिखों हेतु सबसे पवित्र जगहों में से एक है. सिखों के पहले गुरु, गुरुनानक देव जी का निवास स्‍थान करतारपुर साहिब था. सिखों के पहले गुरु, गुरुनानक देव ने अपनी जिंदगी के अंतिम 17 साल 5 महीने 9 दिन यहीं गुजारे थे. सारा परिवार उनका यहीं आकर बस गया था. यहीं पर उनके माता-पिता और उनका देहांत भी हुआ था. इस कारण से यह पवित्र स्थल सिखों के मन से जुड़ा धार्मिक स्थान है.

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