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18 November 2019

न्यायमूर्ति शरद अरविंद बोबडे ने मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ ली

न्यायमूर्ति शरद अरविंद बोबडे ने 18 नवंबर 2019 को देश के 47वें मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) पद की शपथ ली. उन्हें राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने सीजेआई पद की शपथ दिलाई. उन्होंने मौजूदा मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई का स्थान लिया है. न्यायमूर्ति शरद अरविंद बोबडे 17 महीने तक सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पद पर रहेंगे तथा 23 अप्रैल 2021 को सेवानिवृत्त होंगे. न्यायमूर्ति शरद अरविंद बोबडे महाराष्ट्र के एक प्रसिद्ध वकीलों के परिवार से आते हैं. पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने 03 अक्टूबर 2018 को 46वें मुख्य न्यायाधीश पद के रूप में शपथ ली थी. उनका कार्यकाल मुख्य रूप से 13 महीने 15 दिन का रहा. उन्होंने अयोध्या विवाद पर महत्वपूर्ण फैसला दिया. उन्होंने राफेल मामले में पुनर्विचार याचिका भी खारिज की.

न्यायमूर्ति शरद अरविंद बोबडे का जन्म 24 अप्रैल 1956 को महाराष्ट्र के नागपुर में हुआ था. वे महाराष्ट्र के एक प्रसिद्ध वकीलों के परिवार से आते हैं. उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय से कला एवं कानून में स्नातक की उपाधि हासिल की है. न्यायमूर्ति बोबडे साल 1998 में वरिष्ठ अधिवक्ता बने. उन्होंने करीब 21 साल तक नागपुर पीठ में सेवाएं दीं. वे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस भी रहे. उनको अप्रैल 2013 में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था. उनके पिता अरविंद श्रीनिवास बोबडे महाराष्ट्र के पूर्व महाधिवक्ता थे. इसके अतिरिक्त उनके भाई भी एक वरिष्ठ वकील थे.

न्यायमूर्ति शरद अरविंद बोबडे ने कई ऐतिहासिक फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. हाल ही में उन्होंने अयोध्या के विवादित स्थल पर राम मंदिर बनाने का रास्ता साफ करने के फैसले में भी वे शामिल रहे हैं. वे निजता के अधिकार हेतु गठित सात जजों की संविधान पीठ में भी शामिल रहे थे. न्यायमूर्ति बोबडे आधार को लेकर उस बेंच में भी शामिल रहे जिसने कहा था कि जिन लोगों के पास आधार नहीं है उन्हें सुविधाओं से दूर नहीं किया जायेगा. न्यायमूर्ति बोबडे की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने हाल ही में बीसीसीआई का प्रशासन देखने हेतु पूर्व नियंत्रक एवं महालेखाकार विनोद राय की अध्यक्षता में बनाई गई प्रशासकों की समिति को आदेश दिया कि वे निर्वाचित सदस्यों के लिए कार्यभार छोड़े.

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