मासिक करेंट अफेयर्स

13 December 2019

नीरव मोदी दूसरा भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित

मुंबई की भगोड़ा आर्थिक अपराध अधिनियम (पीएमएलए) कोर्ट ने हाल ही में नीरव मोदी को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया है. कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) घोटाले के आरोपी हीरा कारोबारी नीरव मोदी को भगोड़ा आर्थिक अपराधी करार दिया है.नीरव मोदी, विजय माल्या के बाद दूसरा ऐसा कारोबारी है जिसे नए भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम 2018 के तहत भगोड़ा आर्थिक अपराधी करार दिया गया है. इससे पहले, विजय माल्या को इसी अधिनियम के तहत आर्थिक अपराधी घोषित किया गया था. यह अधिनियम अगस्त 2018 में प्रभाव में आया था.

नीरव मोदी पर लगभग 14,000 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है. विजय माल्या को विभिन्न भारतीय बैंको के लगभग 9000 करोड रुपये हड़पकर भाग जाने के वजह से भगोड़ा घोषित किया किया गया था. नीरव मोदी एवं उसका मामा मेहुल चौकसी पीएनबी घोटाले में मुख्य आरोपी हैं. देश का सबसे बड़ा बैंकिंग घोटाला जनवरी 2018 में सामने आया था.

नीरव मोदी और उसका मामा मेहुल चैकसी पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) से 14,000 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा करने के मामले में मुख्य आरोपी हैं. नीरव मोदी के खिलाफ फरवरी 2017 में घोटाले से संबंधित मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था. मामले का खुलासा होते ही नीरव मोदी के खिलाफ खलबली मच गई. इस बीच, नीरव मोदी देश छोड़कर यूरोप भाग गया. तब से, भारत सरकार नीरव मोदी को वापस लाने की कोशिश कर रही है. मार्च 2018 में नीरव मोदी को लंदन में गिरफ्तार किया गया था. उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया चल रही है.

भगोड़े आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 के अनुसार, 100 करोड़ रुपये या इससे अधिक के आर्थिक अपराध में शामिल व्यक्ति अगर देश छोड़कर चला जाता है तथा लौटन से इनकार करता है तो उसे भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया जा सकता है. इस कानून के अंतर्गत बिना किसी इजाजत के अपराधियों की संपत्ति जब्त कर और उन्हें बेचकर उधारदाताओं को भुगतान किया जा सकता है. ऐसे आर्थिक अपराधियों के विरुद्ध भगोड़ा आर्थिक अपराध अधिनियम (पीएमएलए) के अंतर्गत मुकदमा चलता है.अगर आरोपी व्यक्ति अदालत में पेश होता है, तो कार्यवाही रोक दी जाएगी और उस व्यक्ति को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित नहीं किया जाएगा. भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया व्यक्ति विशेष अदालत के फैसले को 30 दिनों के भीतर उच्च न्यायालय में चुनौती दे सकता है.

No comments:

Post a Comment