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06 December 2019

संसद भवन के कैंटीन में खाने पर मिलने वाली सब्सिडी ख़त्म करने के प्रस्ताव को मंजूरी

संसद भवन में कैंटीन में खाने पर मिलने वाली सब्सिडी अब खत्म हो सकती है. इस प्रस्ताव को सभी सांसदों ने मंजूरी दे दी है. अब संसद सदस्यों को सामान्य दर पर भोजन मिलेगा. संसद की कैंटीन में सब्सिडी की लागत लगभग 15 करोड़ रुपये सालाना है. संसद की कैंटीन में अब किसी को भी सब्सिडी नहीं मिलेगी. इस पर पक्ष एवं विपक्ष ने एक साथ मिलकर फैसला किया है कि अब कैंटीन में सब्सिडी नहीं मिलेगी. अब कैंटीन में इस फैसले के बाद खाने के दाम लागत के हिसाब से तय होंगे. पिछले लोकसभा के दौरान कैंटीन में खाद्य मूल्य में वृद्धि की गई थी और सब्सिडी बिल को कम किया गया था. लेकिन अब, सरकार सब्सिडी को पूरी तरह से खत्म करने के लिए तैयार है.

सूचना के अधिकार के अंतर्गत दिए गए ब्योरे के अनुसार, साल 2012-13 से साल 2016-17 तक संसद कैंटीनों को कुल 73,85,62,474 रुपये बतौर सब्सिडी दिए गए थे. सांसदों के सस्ते भोजन पर साल 2012-13 में 12,52,01867 रुपये की सब्सिडी दिए गए थे. साल 2013-14 में 14,09,69082 रुपये सब्सिडी के तौर पर दिए गए थे. इसी तरह साल 2014-15 में 15,85,46612 रुपये की सब्सिडी दिए गए थे. साल 2015-16 में 15,97,91259 रुपये की सब्सिडी दिए गए थे. वहीँ, साल 2016-17 में सांसदों को सस्ता भोजन मुहैया कराने पर 15,40,53365 रुपये की सब्सिडी दी गई थी.

लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला के सुझाव के बाद व्यापार सलाहकार समिति ने इस विषय पर चर्चा की थी. जिसमें इस विषय पर सभी पार्टियों ने सहमति जताई है. लोकसभा की कैंटीन के दामों में बढ़ोत्तरी साल 2017 में की गई थी तथा सब्सिडी को कम कर दिया गया था. संसद की कैंटीन में मिलने वाली सब्सिडी बहुत बार विवादों का हिस्सा रही है. हाल ही में, संसद की कैंटीन की रेट लिस्ट भी वायरल हुई थी. देखा गया है कि, सब्सिडी के तहत देश के सांसदों के संसद की कैंटीन में खाना बहुत कम दाम पर मिलता था. बीजू जनता दल (बीजद) सांसद बैजयंत जय पांडा ने साल 2015 में स्पीकर को एक पत्र लिखा और खाद्य सब्सिडी को खत्म करने के लिए कहा था. हाल ही में जवाहार लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में हॉस्टल और कैंटीन में फीस बढ़ोतरी के बाद छात्रों ने संसद की कैंटीन में मिलने वाली सब्सिडी की आलोचना की थी जिसके बाद इस सब्सिडी को खत्म किए जाने की चर्चा थी.

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