मासिक करेंट अफेयर्स

25 December 2019

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को अपडेट करने की मंजूरी दी

केन्द्रीय मंत्रीमंडल ने नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (National Population Register) को अपडेट करने की मंजूरी दे दी है. अब देश के हर नागरिक को राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर में अपना नाम दर्ज करवाना होगा. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) के अपडेशन के लिए एक विशेष ऐप तैयार किया गया है. नागरिकों को अपना नाम दर्ज कराने के लिए किसी दस्तावेज की जरूरत नहीं पड़ेगी. नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (National Population Register) को अपडेट करने के लिए 1 अप्रैल, 2020 से 30 सितंबर, 2020 तक लोगों के घर-घर जाकर आकड़े जुटाए जाएंगे. कैबिनेट से जनगणना 2021 के लिए 8,754.23 करोड़ और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) के अपडेशन के लिए 3,941.35 करोड़ की मंजूरी मिली है. देश के सामान्य निवासियों की व्यापक पहचान का डेटाबेस बनाना एनपीआर का मुख्य लक्ष्य है. इस डेटा में जनसांख्यिकी के साथ बायोमीट्रिक जानकारी भी होगी. एनपीआर अपडेट करने की प्रक्रिया अगले साल पहली अप्रैल से शुरू होने वाली है.

नेशनल पापुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) देश के निवासियों का एक रजिस्टर है. इसे नागरिकता अधिनियम 1955 और नागरिकता (नागरिकों का पंजीयन और राष्ट्रीय पहचान) नियम 2003 के प्रावधानों आधार पर स्थानीय (ग्राम/कस्बा/तहसील) /उपजिला/जिला/राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जाता है. भारत में रहने वाले प्रत्येक नागरिक के लिए नेशनल पापुलेशन रजिस्टर में पंजीयन कराना अनिवार्य है. एनपीआर के लिए नागरिक की जो परिभाषा तय की गई है, उसके मुताबिक जो व्यक्ति पिछले 6 महीने या उससे अधिक समय से स्थानीय क्षेत्र में निवास कर रहा हो या एक व्यक्ति जो वहां अगले 6 महीने या उससे ज्यादा निवास करने का इरादा रखता है, उसे नागरिक माना जाएगा.

राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर का उद्देश्य देश में रहने वाले प्रत्येक निवासी की पहचान का एक व्यापक डाटाबेस तैयार करना है. डाटाबेस में नागरिकों की जनसांख्यिकी जानकारी दर्ज की जाएगी. इसका एक मकसद सरकारी योजनाओं की पहुंच असली लाभार्थियों तक पहुंचाना भी है. राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) के लिए डाटा, साल 2010 में भारत की जनगणना के लिए घरों के सूचीकरण की प्रक्रिया के दौरान ही एकत्र कर लिया गया था. इस डाटा के अपडेशन का काम साल 2015 में हुए डोर-टू-डोर सर्वे के दौरान ही कर लिया गया. इस अपडेटेड जानकारी का डिजिटलीकरण भी पूरा हो चुका है. इसके बाद नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर को भी अपडेट करने का निर्णय हो चुका है. 

एनपीआर को अपडेट करने का काम साल 2021 की जनगणना के लिए अप्रैल से सितंबर 2020 के बीच होने वाली घरों की सूचीकरण प्रक्रिया के साथ होगा. केंद्र सरकार इस आशय को लेकर एक राजपत्रित अधिसूचना पहले ही प्रकाशित कर चुकी है. ये प्रक्रिया असम को छोड़कर देश के अन्य सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में होगी. असम को बाहर इसलिए रखा गया है क्योंकि अवैध प्रवासियों की पहचान करने के लिए वहां एनआरसी (नागरिकों का राष्ट्रीय रजिस्टर) की प्रक्रिया पहले ही हो चुकी है. नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर की प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी होगी. पहला चरण 1 अप्रैल 2020 लेकर से 30 सितंबर 2020 के बीच होगा, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारी घर-घर जाकर आंकड़े जुटाएंगे. दूसरा चरण 9 फरवरी 2021 से 28 फरवरी 2021 के बीच पूरा होगा. तीसरे चरण में 1 मार्च 2021 से 5 मार्च 2021 के बीच संशोधन की प्रक्रिया होगी.

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार में साल 2010 में एनपीआर बनाने के लिए पहल की गई थी. साल 2011 में हुई जनगणना के पहले इस पर काम शुरू हुआ था. अब फिर 2021 में जनगणना होनी है. ऐसे में एनपीआर पर भी काम शुरू हो रहा है. देश में हर दस साल में एक बार जनगणना की जाती है. आजादी के बाद से अबतक कुल सात बार जनगणना हो चुकी है. पहली जनगणना साल 1951 में हुई थी. वहीं पिछली जनगणना साल 2011 में हुई थी. फिलहाल 2021 की जनगणना के लिए काम चल रहा है.

No comments:

Post a Comment