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06 December 2019

केंद्रीय मंत्रीमंडल ने नागरिकता संशोधन बिल को मंजूरी दी

नागरिकता (संशोधन) विधेयक को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दे दी गई. यह बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 04 दिसंबर 2019 को हुई. इस बिल को अब अगले हफ्ते संसद में पेश किया जा सकता है. इससे पहले, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 03 दिसंबर को असम के छात्र संगठनों और नागरिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ नागरिकता संशोधन विधेयक पर बैठकें की थीं. इस बिल के अनुसार, नागरिकता प्रदान करने से जुड़े नियमों में बदलाव होगा और अवैध प्रवासियों को बैगर दस्तावेज के नागरिकता मिलेगी. 
नागरिकता संशोधन विधेयक में नागरिकता कानून, 1955 में संशोधन का प्रस्ताव है. इसमें बांग्लादेश, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्मों के शरणार्थियों हेतु नागरिकता के नियमों को आसान बनाना है. इस बिल संशोधन का मुख्य उद्देश्य चुनिंदा श्रेणियों में अवैध प्रवासियों को छूट देना है. विधेयक में बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में धर्म के आधार पर प्रताड़ित किये जाने के कारण संबंधित देश से पलायन करने वाले हिंदू, जैन, ईसाई, सिख, बौद्ध एवं पारसी समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है. असम एवं अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में इस विधेयक का विरोध हो रहा है, जहां अधिकतर हिंदू प्रवासी रह रहे हैं.

गौरतलब है कि मसौदा विधेयक में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए ऐसे गैर मुस्लिमों को नागरिकता प्रदान करने की बात कही गई है जो वहां उत्पीड़न का शिकार होते हैं. मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में नागरिकता संशोधन विधेयक को पेश किया था लेकिन विपक्षी दलों के विरोध के चलते इसे पारित नहीं कराया जा सका. विपक्ष ने इस विधेयक की आलोचना करते हुए इसे धार्मिक आधार पर भेदभावपूर्ण बताया. 

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