मासिक करेंट अफेयर्स

08 March 2020

केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के 10 बैंकों के विलय को मंजूरी दी

कैबिनेट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 04 मार्च 2020 को सार्वजनिक क्षेत्र के 10 बैंकों के विलय को मंजूरी दे दी है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि विलय 01 अप्रैल 2020 से प्रभाव में आ जायेगा. उन्होंने  कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के दस बैंकों का विलय कर चार बड़े बैंक बनाने का काम जारी है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विलय प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है और सरकार संबंधित बैंकों के साथ लगातार संपर्क में है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अर्थव्यवस्था को गति देने के उद्देश्य से हाल ही में घोषणा की थी कि भारत सरकार के स्वामित्व वाले दस बैंकों का चार बड़े बैंकों में विलय कर दिया जाएगा.

पंजाब नेशनल बैंक में ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स तथा यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया का विलय किया जाएगा, जिससे यह देश का दूसरा सबसे बड़ा बैंक बन जाएगा. इसके अतिरिक्त केनरा बैंक के साथ सिंडिकेट बैंक का विलय होगा. वहीं विलय के बाद बनने वाला बैंक देश का चौथा सबसे बड़ा सरकारी बैंक बन जाएगा. आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक के साथ यूनियन बैंक का विलय होगा. यह विलय के बाद बनने वाला बैंक देश का 5वां सबसे बड़ा सरकारी बैंक होगा. इलाहाबाद बैंक और इंडियन बैंक का भी विलय होना है. वहीं यह विलय के बाद बनने वाला बैंक देश का 7वां सबसे बड़ा सरकारी बैंक होगा.

बैंकों का यह विलय 01 अप्रैल 2020 से प्रभावित होगा. इसके परिणामस्‍वरूप सार्वजनिक क्षेत्र के सात बड़े बैंकों का व्‍यापक स्‍तर पर सृजन होने के अतिरिक्त प्रत्‍येक व्‍यापक एकीकरण में अस्सी लाख करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार के साथ-सा‍थ इसकी राष्‍ट्रीय स्‍तर तक पहुंच होगी. इस एकीकरण से इन बैंकों में बड़े स्‍तर के ऋणों में सहायता के साथ-साथ व्‍यापक वित्‍तीय क्षमता के द्वारा प्रतिस्‍पर्धात्‍मक कार्य संचालनों को भी प्रोत्‍साहन मिलेगा. सभी एकीकृत बैंकों में सर्वोत्‍तम कार्य प्रणालियों को अपनाने से बैंकों में उनकी लागत कुशलता तथा जोखिम प्रबंधन में सुधार होगा एवं व्‍यापक पहुंच के माध्‍यम से वित्‍तीय समावेशन के लक्ष्‍य में भी वृद्धि होगी. बैंकों के विलय से उनकी परिचालन लागत में भी कमी आती है. बैंकों के विलय से बैंकों की कार्यकुशलता में भी वृद्धि देखी जाती है. यह सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को बिना राज्य के कोष की सहायता लिये और अधिक संसाधन जुटाने में मदद करता है. सरकार पर सार्वजानिक बैंकों के वित्तपोषण का भार भी कम हो जाता है.

No comments:

Post a Comment