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02 March 2020

केन्द्र सरकार ने प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के तहत 32 परियोजनाओं को मंजूरी दी

केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (पीएमकेएसवाई) के तहत खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में 32 परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है. इस परियोजनाओं को 17 राज्यों में फैलाया जाएगा. प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के तहत 406 करोड़ रुपये की फंड की मंजूरी प्रदान की गयी है. केन्द्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री हरसिमरत कौर बादल की अध्यक्षता में हुई अंतर-मंत्रालयी अनुमोदन समिति (आईएमएसी) की बैठक में प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना की मंजूरी दी गई है. ये 32 परियोजनायें देश के 17 राज्यों में होंगी. परियोजनाओं का मुख्य फोकस ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना और लगभग 15000 लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा करना है. इस योजना का उद्देश्य मौजूदा खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों का आधुनिकीकरण / विस्तार, और मूल्य वर्धन करना है तथा उनकी प्रसंस्करण एवं संरक्षण क्षमताओं को बढ़ाकर कृषि उपज की बर्बादी को रोकना है.

नई परियोजनाएं 406 करोड़ रुपये के निवेश के साथ 17 राज्यों को कवर करेंगी. इन परियोजनाओं के तहत लगभग पंद्रह हजार लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा, खासतौर से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा होंगे. आधुनिक प्रसंस्करण तकनीकों से कृषि उपज को ज्यादा दिन सुरक्षित रखा जा सकता है, जिससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी. घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय किसानों को उपभोक्ताओं से जोड़ने में खाद्य प्रसंस्करण की अहम भूमिका है. खाद्य प्रसंस्करण उद्योग अर्थव्यवस्था की दिशा में बेहतर योगदान हेतु किसानों, सरकार और बेरोजगार युवाओं के बीच कड़ी का काम कर सकता है.
प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना क्या है?

प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना की शुरुआत अगस्‍त 2017 में की गई थी. यह योजना पूरी तरह से कृषि केंद्रित योजना है. इस योजना का मुख्य उद्देश्‍य कृषि का आधुनिकीकरण करना और कृषि बर्बादी को कम करना है. इस योजना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा 14वें वित्‍त आयोग चक्र की सह-समाप्ति के साथ वर्ष 2016-20 तक की अवधि हेतु 6,000 करोड़ रुपए के आवंटन से एक नई केंद्रीय क्षेत्र स्‍कीम-प्रधान मंत्री किसान संपदा योजना का अनुमोदन दिया है. प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना का मुख्य उद्देश्‍य मार्डन इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर की सहायता से कृषि में विकास को लेकर सही मैनेजमेंट और बुनियादी ढ़ाचे का निर्माण करना है. इसके द्वारा कोई कृषि संबंधी चीज समय पर उत्‍पादक यानी की किसान के पास पहुंच जाएगी. किसानों को उनके उपज हेतु बेहतर मूल्य मिलेगा, इससे ग्रामीण भारत में रोजगार के अवसर पैदा होंगे.

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