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08 March 2020

महाराजा रणजीत सिंह को विश्व का सर्वकालिक महान नेता चुना गया

बीबीसी वर्ल्ड हिस्ट्री मैगज़ीन द्वारा कराए गए एक सर्वेक्षण में महाराजा रणजीत सिंह को दुनिया में सर्वकालिक 'सबसे महान नेता' के रूप में चयनित किया गया है. महाराजा रणजीत सिंह 19वीं सदी के सिख साम्राज्य के भारतीय शासक थे. रंजीत सिंह, जिन्हें 'पंजाब का शेर' कहा जाता है, आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता के बाद सत्ता में आए. पत्रिका में बताया गया कि 19वीं शताब्दी के शुरुआती दशक में उन्होंने सिख खालसा सेना का आधुनिकीकरण किया था. महाराजा रणजीत सिंह को एक सहिष्णु साम्राज्य बनाने के लिए 38 प्रतिशत से अधिक वोटों के साथ चुना गया. इस पोल में 5,000 से अधिक पाठकों ने भाग लिया और अपने वोट के आधार पर चयन किया. 

महाराजा रणजीत सिंह का जन्म 13 नवंबर 1780 को गुजरांवाला, पाकिस्तान में हुआ था. उन्हें 'पंजाब का शेर' के नाम से भी जाना जाता है और उन्हें सबसे महान सिख नेताओं में गिना जाता है. रणजीत सिंह ने न केवल पंजाब को एकजुट रखा, बल्कि अंग्रेजों को अपने साम्राज्य पर कब्जा करने की अनुमति नहीं दी. महाराजा रणजीत सिंह ने लगभग 40 वर्षों (1801-1839) तक पंजाब पर शासन किया. उन्होंने अपने राज्य को इतना शक्तिशाली बना दिया था कि उनके शासनकाल के दौरान ब्रिटिश सेना ने भी कभी उनपर हमला करने की हिम्मत नहीं की. महाराजा रणजीत सिंह का निधन 27 जून, 1839 को हुआ था. उस समय उनकी आयु 59 वर्ष थी. उन्होंने पंजाब में कानून-व्यवस्था स्थापित की और कभी किसी को मृत्युदंड नहीं दिया. उन्हें विश्व इतिहास में एक धर्मनिरपेक्ष नेता के रूप में जाना जाता है. उन्होंने हिंदुओं और सिखों से जजिया भी प्रतिबंधित कर दिया था. उन्होंने कभी किसी को सिख धर्म अपनाने के लिए मजबूर नहीं किया.

पोल में दूसरे स्थान पर रहे एमिलकर कैबरल को 25 प्रतिशत वोट मिले. कैबरल अफ्रीकी स्वतंत्रता सेनानी थे और उन्होंने अफ्रीकी स्वतंत्रता में एक प्रमुख भूमिका निभाई थी. गिनी को पुर्तगाल के नियंत्रण से मुक्त करने के लिए एमिलकर कैबरल ने एक लाख से अधिक लोगों को एकजुट किया और इसके बाद कई अफ्रीकी देशों को आजादी की लड़ाई के लिए प्रोत्साहित किया गया. विंस्टन चर्चिल, जो युद्ध के समय ब्रिटिश प्रधानमंत्री थे, सात प्रतिशत वोट के साथ त्वरित निर्णयों में तीसरे स्थान पर रहे. पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन चौथे और ब्रिटिश महारानी एलिजाबेथ प्रथम महिलाओं में पांचवें स्थान पर रहीं. 

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