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16 April 2020

भारत की आर्थिक वृद्धि 2020-21 में 1.9 प्रतिशत रहने का अनुमान: आईएमएफ

अंतरराष्‍ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने 14 अप्रैल 2020 को वित्त वर्ष 2020-21 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर सिर्फ 1.9 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है. हालांकि, आईएमएफ ने कहा कि इसके बावजूद भारत दुनिया में सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था का तमगा अपने पास बरकरार रखेगा. वहीं, आईएमएफ ने इस दौरान चीन की वृद्धि दर 1.2 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है. आईएमएफ ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी और उसके कारण विश्व भर में आर्थिक गतिविधियां ठप होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था भीषण मंदी की ओर बढ़ रही है. यह साल 1930 में आयी महामंदी के बाद सबसे बड़ी मंदी है. भारत में आर्थिक वृद्धि का यह स्तर रहता है तो यह साल 1991 में शुरू उदारीकरण के बाद सबसे कम वृद्धि दर होगी.

आईएमएफ ने इसके बावजूद विश्व अर्थव्यवस्था के बारे में अपनी रिपोर्ट के नये संस्करण में भारत को तीव्र वृद्धि वाली उभरती अर्थव्यवस्थाओं की श्रेणी में रखा है. भारत उन दो बड़े देशों में शामिल है जहां 2020 में वृद्धि दर सकारात्मक होगी. दूसरा देश चीन है जहां आईएमएफ के मुताबिक 1.2 प्रतिशत वृद्धि दर रह सकती है. आईएमएफ की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने कहा कि हमारा अनुमान है कि साल 2020 में वैश्विक वृद्धि में 3 प्रतिशत की गिरावट आएगी. यह जनवरी 2020 से 6.3 प्रतिशत की गिरावट है. इतने कम समय में बड़ा बदलाव किया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि कोरोना वायरस (कोविड-19) महामारी से सभी क्षेत्रों में वृद्धि दर प्रभावित होगी. गोपीनाथ ने कहा कि यह संकट गहरा है और इसके लोगों के जीवन तथा आजीविका पर प्रभाव को लेकर काफी अनिश्चितता है.

आईएमएफ की रिपोर्ट के मुताबिक विकसित देशों की श्रेणी में ज्यादातर देशों की आर्थिक वृद्धि में गिरावट आएगी. इसमें अमेरिका (5.9 प्रतिशत की गिरावट), जापान (5.2 प्रतिशत की गिरावट), ब्रिटेन (6.5 प्रतिशत की गिरावट), जर्मनी (7.0 प्रतिशत की गिरावट), फ्रांस (7.2 प्रतिशत की गिरावट), इटली (9.1 प्रतिशत की गिरावट) और स्पेन 8.0 प्रतिशत की गिरावट में रह सकता है. ब्राजील में आर्थिक वृद्धि दर में 5.3 प्रतिशत और मेक्सिको में 6.6 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान है. उभरते और विकासशील यूरोप में वृद्धि दर में 5.2 प्रतिशत की गिरावट जबकि रूस की अर्थव्यवस्था में 5.5 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान है. रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम एशिया और मध्य एशिया में वृद्धि दर में 2.8 प्रतिशत की गिरावट आने की आशंका हैं. इसमें सऊदी अरब की जीडीपी वृद्धि 2.3 प्रतिशत सिकुड़ सकती है.

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