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30 April 2020

मई 2020 के अंत तक भारत में विकसित हो जाएगी त्वरित परीक्षण किट: डॉ. हर्षवर्धन

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने हाल ही में कहा है कि कोरोना वायरस संक्रमण की जांच के लिए त्वरित परीक्षण किट का भारत में ही अगले महीने (मई 2020) के अंत तक निर्माण शुरु हो जाएगा. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने 28 अप्रैल 2020 को जैव प्रौद्योगिकी विभाग और इससे संबंधित शोध संस्थाओं के शीर्ष अधिकारियों के साथ कोरोना वायरस के खिलाफ अभियान में तकनीकी संसाधनों को विकसित करने हेतु चलाये जा रहे कार्यों की समीक्षा बैठक की. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने बैठक के बाद जानकारी देते हुए कहा कि इसी साथ देश में कोरोना संक्रमण की परीक्षण क्षमता एक लाख प्रतिदिन तक पहुंचाने के लक्ष्य की भी पूरा हो जाएगा. मंत्रालय द्वारा जारी बयान के मुताबिक डॉ हर्षवर्धन ने इस दिशा में वैज्ञानिकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि देश में आगामी मई के अंत तक स्वदेशी तकनीक पर आधारित त्वरित परीक्षण एंटीबॉडी किट और आरटीपीएस किट का निर्माण शुरु हो जाएगा.

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने समीक्षा के दौरान कहा कि स्वदेशी रैपिड टेस्ट और आरटी-पीसीएस डायग्नोस्टिक किट बनाने के मामले में मई 2020 तक हमारा देश आत्मनिर्भर हो जाएगा. इस दौरान आनुवांशिक अनुक्रमण के बारे में चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि ये अनुवांशिक अनुक्रमण के प्रयास मुझे 26 साल पहले के पोलियो उन्मूलन अभियान की याद दिलाती है. उस समय भी, पोलियो वायरस के संक्रमण की अवस्थाओं को उजागर करने के लिए आनुवांशिक अनुक्रमण का उपयोग किया गया था, जिसने अंततः पोलियो के उन्मूलन में मदद की.

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने इस दौरान वैज्ञानिकों से कोरोना वायरस का टीका, नई दवा और इलाज की पद्धति के साथ-साथ अन्य जरूरी चिकित्सा उपकरण विकसित करने के लिए तेजी से काम करने का आग्रह किया. उन्होंने बताया कि टीका विकसित करने संबंधी लगभग आधा दर्जन परीक्षण के प्रयास चल रहे हैं और इनमें से चार उन्नत चरण में हैं. उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा इस दिशा में 150 से अधिक स्टार्टअप सॉल्यूशन को सहायता दी जा रही है.

जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) ने कोविड से निपटने के लिए तत्काल समाधान के साथ-साथदीर्घकालिक तैयारियों के लिए एक बहु-आयामी अनुसंधान रणनीति और कार्य योजना तैयार की है. इस बहुपक्षीय प्रयासों में कोविड के लिए फ्लू जैसा टीका विकसित करने के साथ ही होस्ट और पैथोजन पर स्वदेशी डायग्नोस्टिक्स जीनोमिक अध्ययन शामिल है.

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