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28 April 2020

केंद्र सरकार ने बैंकिंग सेवाओं को 21 अक्‍टूबर तक के लिए सार्वजनिक उपयोगिता सेवा घोषित किया

केंद्र सरकार ने औद्योगिक विवाद अधिनियम के प्रावधानों के तहत बैंकिंग उद्योग को छह महीने के लिए अर्थात आगामी 21 अक्टूबर तक सार्वजनिक उपयोगिता सेवा घोषित किया है. इस घोषणा का यह अर्थ है कि 21 अप्रैल से शुरू होने वाले इस अधिनियम के संचालन के दौरान बैंकिंग क्षेत्र के कर्मचारी या अधिकारी द्वारा कोई हड़ताल नहीं की जा सकेगी. वित्तीय सेवा विभाग ने यह घोषणा की है कि श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने अगले छह महीने के लिए अर्थात 21 अक्टूबर तक बैंकिंग उद्योग को सार्वजनिक उपयोगिता सेवा के रूप में घोषित किया है. कोरोना वायरस महामारी के कारण लगाए गए लॉकडाउन के बीच श्रम मंत्रालय ने 17 अप्रैल, 2020 को यह अधिसूचना जारी की थी. इस लॉकडाउन ने देश की आर्थिक गतिविधियों को बहुत प्रभावित किया है. 

बैंकिंग उद्योग को सार्वजनिक उपयोगिता सेवा घोषित करने के पीछे मुख्य उद्देश्य कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर आर्थिक संकट में फसें ग्राहकों को सुरक्षा प्रदान करना और बेहतर तरीके से उनकी सेवा करना है. औद्योगिक विवाद अधिनियम के प्रावधानों के तहत बैंकिंग सेवाओं को लाने का मतलब है कि संगठित बैंकिंग क्षेत्र के कर्मचारी और अधिकारी कुछ अन्य गतिविधियों के अलावा हड़ताल पर नहीं जा पाएंगे. यह कानून 21 अप्रैल, 2020 से लागू किया गया है. 

बैंकिंग क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक कर्मचारी और अधिकारी यूनियनें हैं. बैंकिंग संघ अक्सर अपने कर्मचारियों के वेतन को लेकर मुद्दा उठाते हैं, जिसे भारतीय बैंक एसोसिएशन (IBA) को हर तीन साल में निपटाना होता है. सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और निजी क्षेत्र के पुराने बैंक जैसेकि, ICCI, HDFC, Axis Bank और Federal Bank भारतीय बैंक एसोसिएशन का हिस्सा हैं. भारत में कुछ पुराने विदेशी बैंक जैसेकि, HSBC, सिटी बैंक और स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक भी इसका हिस्सा हैं. IBA द्वारा निर्धारित किए जाने वाले वेतन निपटान और अन्य कर्मचारी मुद्दों के तहत ये सभी बैंक शामिल हैं. निजी क्षेत्र के नए बैंक जैसे इंडसइंड, येस बैंक और कोटक बैंक IBA के मानदंडों के दायरे से बाहर हैं.

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