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30 April 2020

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से ‘एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड’ योजना अपनाने के लिए कहा

सर्वोच्च न्यायालय ने 27 अप्रैल को जारी अपने एक आदेश में केंद्र से यह कहा है कि वह मौजूदा कोविड -19 लॉकडाउन के दौरान 'एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड' योजना को अपनाए. रियायती (सब्सिडाइज्ड) भोजन का लाभ पाने के लिए यह योजना प्रवासी श्रमिकों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए फायदेमंद होगी. इस योजना को जून 2020 में केंद्र सरकार द्वारा शुरू किया जाना था. सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश से ऐसे अनेक प्रवासी श्रमिकों और अन्य लाभार्थियों को मदद मिलेगी जो भारत के विभिन्न राज्यों में फंसे हुए हैं और स्थानीय पहचान पत्र के बिना बुनियादी सुविधाओं का लाभ नहीं उठा सकते हैं.

न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, एनवी रमण और बीआर गवई की पीठ ने एक आदेश पारित किया है जिसमें यह कहा गया है कि भारत संघ को 'एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड योजना' के कार्यान्वयन पर विचार करना चाहिए और यह परखना होगा कि क्या वर्तमान परिस्थितियों में इस योजना को लागू करना संभव है. अदालत का यह निर्देश अधिवक्ता रिपक कंसल द्वारा दायर याचिका के बाद आया है जिसमें उन प्रवासी श्रमिकों और अन्य लाभार्थियों के लिए यह योजना शुरू करने की मांग की गई है जो वर्तमान में अपने राज्य में नहीं हैं और इस लॉकडाउन के दौरान भारत के विभिन्न राज्यों में फंसे हुए हैं. अधिवक्ता द्वारा याचिका में, प्रवासी श्रमिकों और लाभार्थियों के अधिकारों की रक्षा के लिए लॉकडाउन के दौरान शुरू किये गए रियायती भोजन का लाभ उठाने के साथ ही सरकारी योजना के अन्य लाभ उपलब्ध करवाने के लिए अदालत के हस्तक्षेप की मांग की गई है. 

याचिका के अनुसार, देश के विभिन्न राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने स्थानीय नागरिकों या मतदाताओं को चिकित्सा, भोजन, आश्रय के तौर पर ये सभी लाभ दे रहे हैं और उन प्रवासी श्रमिकों या नागरिकों को ऐसे लाभ देने से वंचित रख रहे हैं जो देश के अन्य राज्यों से संबंधित हैं क्योंकि इन प्रवासी श्रमिकों या नागरिकों के पास राशन कार्ड, वोटर कार्ड के तौर पर स्थानीय पहचान प्रमाण नहीं है. अगर केंद्र सरकार ‘एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड योजना’ लाती है, जिसे वह जून 2020 में शुरू करने वाली थी, तो इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग लाभान्वित होंगे और उन श्रमिकों के जीवन की रक्षा हो सकेगी जो कोविड -19 लॉकडाउन के दौरान भारत के विभिन्न राज्यों में फंस गए हैं.

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