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25 April 2020

ईरान ने सैन्‍य उपग्रह 'नूर' को सफलतापूर्वक लॉन्‍च किया

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के एक बयान के अनुसार, ईरान ने 22 अप्रैल, 2020 को अपने पहले सैन्य उपग्रह (मिल्ट्री सैटेलाइट) को पृथ्वी की कक्षा में सफलतापूर्वक छोड़ा है. ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ ईरान के तनाव के बीच यह उपग्रह छोड़ा गया है. ईरान के सरकारी टीवी ने यह घोषणा की है कि ईरान का पहला सैन्य उपग्रह, जिसका नाम 'नूर' है, उसे केंद्रीय रेगिस्तान से 22 अप्रैल को सुबह-सुबह छोड़ा गया था. इस बयान के अनुसार, यह प्रक्षेपण सफल रहा है और उपग्रह अपनी कक्षा में पहुंच गया है.

ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने अपनी वेबसाइट पर एक बयान में इस बात की पुष्टि की है कि ’नूर’ उपग्रह अपनी कक्षा में पहुंच गया है और यह पृथ्वी की सतह से 425 किमी ऊपर से पृथ्वी की परिक्रमा कर रहा है. ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स ने यह भी कहा है कि उसने नूर को छोड़ने के लिए क़ासिद या "मैसेंजर" उपग्रह वाहक का उपयोग किया था. हालांकि, उन्होंने इस तकनीक के बारे में कोई ख़ुलासा नहीं किया है. उन्होंने जो एकमात्र ख़ुलासा किया है उसके मुताबिक, तीन-चरण वाले क़ासिद उपग्रह वाहक में ठोस और तरल ईंधन के संयोजन का उपयोग किया गया था. ईरान के सरकारी टीवी ने दिखाया कि क़ासिद उपग्रह वाहक पर पवित्र कुरान से एक आयत अंकित थी, जिसे अक्सर यात्रा करते समय मुसलमान पढ़ते हैं. इस आयत का अर्थ है, "महिमा उसी (ईश्वर) की, जिसने हमें यह प्रदान किया है, क्योंकि हम इसे अपने प्रयासों से कभी नहीं बना सकते थे."

ईरान ने अपना सैन्य उपग्रह ऐसे समय में छोड़ा है जब संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ उसके संबंध, विशेष रूप से अमेरिका द्वारा 3 जनवरी, 2020 को ड्रोन हमले के माध्यम से ईरानी मेजर जनरल कासेम सोलेमानी को मारने के बाद, बहुत तनावपूर्ण हैं. सोलेमानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स कड्स फोर्स के सर्वोच्च सैन्य कमांडर थे और यह सेना की एक ऐसी डिवीजन है जो मुख्य रूप से प्रादेशिक सैन्य (एक्स्ट्रा टेरीटोरियल मिलिट्री) गतिविधियों के लिए जिम्मेदार है. सोलेमानी को आयतुल्ला खुमेनी के बाद ईरान में दूसरा सबसे शक्तिशाली व्यक्ति माना जाता था. 


राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के तहत अमरीकी प्रशासन ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए वर्ष 2015 के परमाणु समझौते से ईरान के हटने के बाद उस पर कठोर प्रतिबंध लगाए थे. संयुक्त राज्य अमरीका के अनुसार, ईरान इस समझौते का अनुपालन नहीं कर रहा है और उसने अपने परमाणु कार्यक्रम को सावधानीपूर्वक जारी रखा है. ट्रम्प के अनुसार, वर्ष 2015 के परमाणु समझौते में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर प्रतिबंध शामिल नहीं था.

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