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25 April 2020

मशहूर रंगकर्मी उषा गांगुली का निधन

मशहूर रंगकर्मी उषा गांगुली का 23 अप्रैल 2020 को कोलकाता में निधन हो गया. वे 75 वर्ष की थी. उषा गांगुली के निधन से पूरा रंगजगत स्तब्ध है. उषा गांगुली रंगकर्म से जुड़ी हुई थी. उषा गांगुली ने कोलकाता स्थित श्री शिक्षायतन कॉलेज से स्नातक किया था. बाद में उन्होंने कोलकाता को अपना कार्यक्षेत्र बनाया, कोलकाता जहां बंगाली थियेटर का बोलबाला था वहां उन्होंने हिंदी थियेटर को स्थापित किया. उषा गांगुली ने बहुत से नाटकों की प्रस्तुति दी. इनमें काशी का अस्सी, महाभोज, रुदाली, कोर्ट मार्शल और अंतरकथा ये सब रायपुर सहित देशभर में हो चुके हैं. काशीनाथ सिंह के उपन्यास पर आधारित उनका बहुचर्चित नाटक काशी का अस्सी बहुत चर्चित रहा, पूरे देश में इसका मंचन हुआ था.

उषा गांगुली का जन्म 1945 में उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुआ था. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 1970 में कलकत्ता विश्वविद्यालय से सम्बद्ध एक अंडरग्रेजुएट कॉलेज, भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज, कलकत्ता में एक शिक्षक के रूप में की थी. उषा गांगुली एक भारतीय थियेटर निर्देशक-अभिनेता और कार्यकर्ता थीं. उन्होंने 1976 में रंगकर्मी थिएटर ग्रुप की स्थापना की, जो अपने प्रोडक्शंस जैसे कि महाभोज, रुदाली, कोर्ट मार्शल के लिए जानी जाती हैं. इन्हें 1970 और 1980 के दशक में कोलकाता में हिंदी थिएटर में उनके काम के लिए जाना जाता है. वे कोलकाता में हिंदी रंगमंच का अभ्यास करनेवाली एकमात्र थियेटर निर्देशक थीं, जो काफी हद तक बंगाली भाषी हैं. उन्होंने साल 2008 में अपनी सेवानिवृत्ति तक, भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज में हिंदी व्याख्याता के रूप में अध्यापन कार्य जारी रखा और साथ में थिएटर का अभ्यास किया.

उषा गांगुली के चर्चित नाटकों में महाभोज (1984), लो‍क कथा (1987), होली (1989), कोर्ट मार्शेल(1991, रुदाली (1992), मुक्ति (1999), शोभायात्रा (2000), काशीनामा (2003), मानसी (बंगाली में) (2011) शामिल है. उषा गांगुली को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार रंगमंच से सम्मानित भी किया गया था. उन्हें 'गुडिया घर' नाटक के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के रूप में पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा सम्मानित भी किया गया था.

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