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21 April 2020

विश्व शतरंज चैंपियन विश्वनाथन आनंद WWF इंडिया के पर्यावरण शिक्षा कार्यक्रम के एंबेसडर बने

पांच बार के विश्व शतरंज चैंपियन विश्वनाथन आनंद हाल ही में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ (वर्ल्ड वाइड फंड) इंडिया के पर्यावरण शिक्षा कार्यक्रम के एंबेसडर बने. डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया ने भारत में पर्यावरण सरंक्षण के 50 वर्ष पूरे किए हैं और पर्यावरण के लिए संरक्षण और बचाव के लिए विश्वनाथन आनंद के जुड़ने से खुश है. पूर्व विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद कोरोना वायरस (Corona virus) से लड़ने में भी मदद कर रहे हैं. विश्वनाथन आनंद ने कहा कि हमारे बच्चे बेहतर और हरे भरे पेड़ों से भरी दुनिया के हकदार हैं और माता-पिता के तौर पर यह हमारी जिम्मेदारी है कि उन्हें रास्ता दिखाएं. उन्होंने कहा कि मैं डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया से जुड़कर खुश और रोमांचित हूं. उनके साथ ज्यादा से ज्यादा बच्चों और युवाओं को अपनी प्रकृति को बचाने की जरूरत बताऊंगा.

विश्वनाथन आनंद का जन्म 11 दिसंबर 1969 को तमिलनाडु के मयिलादुथुरई में हुआ था. उन्होंने छह साल की उम्र से अपनी मां से शतरंज खेलना सीखा था. विश्वनाथन आनंद शतरंज की दुनिया के उन चुनिंदा खिलाड़ियों में हैं, जिन्होंने अपने जमाने के हर खिलाड़ी को मात दी है. वे साल 2003 में फीडे विश्व शतरंज चैंपियनशिप में विश्व शतरंज बने और वे अपने समय के ड्रीड खिलाड़ी माने जाते हैं. विश्वनाथन आनंद दुनिया के सिर्फ चौथे खिलाड़ी हैं जिन्होंने चेस रेटिंग सिस्टम ईएलओ में 2800 का अंक पार किया. वे साल 1988 में भारत के पहले ग्रैंडमास्टर बने. वे पांच बार विश्व चैंपियन (साल 2000, साल 2007, साल 2008, साल 2010, साल 2012) रहे थे. वे 'मद्रास टाइगर' और 'विशी' नाम से मशहूर है. साल 1988 में महज 18 साल की उम्र में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया. विश्वनाथन आनंद को साल 1992 में राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार मिला. वे यह सम्मान पाने वाले देश के पहले खिलाड़ी हैं.

WWF का गठन साल 1961 में हुआ था. यह पर्यावरण के संरक्षण, अनुसंधान एवं रख-रखाव संबंधी विषयों पर कार्य करता है. इसका पूरा नाम World Wildlife Fund है. इसका मुख्यालय ग्लैंड (स्विट्ज़रलैंड) में है. इसका मुख्य उद्देश्य पृथ्वी के प्राकृतिक वातावरण के क्षरण को रोकना और एक ऐसे भविष्य का निर्माण करना है जिसमें मनुष्य प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित कर सकें.

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