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12 June 2020

आठ देशों के कानूनविदों ने चीन के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय संसदीय गठबंधन बनाया

अमेरिका और ब्रिटेन सहित 08 देशों के वरिष्ठ सांसद चीन के ख़िलाफ़ एक नया अंतर्राष्ट्रीय संसदीय गठबंधन (IPAC) बनाने के लिए एक साथ मिलकर आगे आए हैं. इस गठबंधन का उद्देश्य वैश्विक व्यापार, मानव अधिकारों और सुरक्षा के लिए चीन से बढ़ते खतरे का मुकाबला करना है. 
चीन का मुकाबला करने के लिए इस तरह का अंतर्राष्ट्रीय संसदीय गठबंधन अपने-आप में पहला है. इसमें यूरोप, ब्रिटेन, संयुक्त राज्य अमेरिका और कुछ अन्य देशों के 18 संसद सदस्य (सांसद) शामिल हैं. इन सांसदों का लक्ष्य चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के शासन के खिलाफ, खासतौर पर इसके कोविड -19 महामारी से निपटने के तरीकों और होंगकोंग में इसके क्रियाकलापों के प्रति, विश्व की स्थिति को मजबूत बनाना है. इस अंतर-संसदीय गठबंधन में  संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोप, यूनाइटेड किंगडम, जापान, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, नॉर्वे और  स्वीडन के सांसद शामिल हैं.

IPAC में दो अमेरिकी सीनेटर - मार्को रुबियो और रॉबर्ट मेनेंडेज़ शामिल हैं, जिन्होंने 2019 में एक बिल पेश किया था जिसमें उइगर मुसलमानों के प्रति चीन के अत्याचार के खिलाफ प्रतिबंध लगाने का आह्वान किया गया था. इस साल अमेरिकी सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स द्वारा इस बिल का संशोधित रूप पारित किया गया था और इस संशोधित बिल के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सहमति का इंतजार है. इस गठबंधन के गठन की घोषणा करते हुए, अमेरिकी सीनेटर मार्को रूबियो ने एक वीडियो संदेश में यह कहा है कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के शासन में चीन एक वैश्विक चुनौती बनता जा रहा है.

IPAC विभिन्न सांसदों का एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय क्रॉस-पार्टी गठबंधन है, जो इस सुधार के लिए एक साथ काम करने के लिए सहमत हुए हैं, कि लोकतांत्रिक देश चीन के साथ कैसे निपट सकते हैं. IPAC गठबंधन का यह मानना ​​है कि चीन का आर्थिक उत्थान व्यवस्थित रूप से वैश्विक, नियम-आधारित व्यवस्था पर गंभीर दबाव डाल रहा है. यह गठबंधन एक ऐसी मुक्त, खुली और नियमों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का समर्थन करता है जो मानव गरिमा का समर्थन करती हो और इसी इरादे से बनाई गई हो. इस गठबंधन का उद्देश्य समान विचारधारा वाले सांसदों के बीच गहन सहयोग को बढ़ावा देना है.

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