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23 August 2020

भारत में सबसे ज्यादा हैं जैविक किसान और विश्व में जैविक खेती का 9वां सबसे बड़ा क्षेत्रफल

भारत को जैविक किसानों के मामले में पहले स्थान पर और जैविक खेती के तहत क्षेत्र के लिए नौवें स्थान पर रखा गया है. 
सिक्किम पूरी तरह से जैविक बनने वाला दुनिया का पहला राज्य बन गया है. उत्तराखंड और त्रिपुरा सहित अन्य राज्यों ने भी ऐसे समान संधारणीयता (सस्टेनेबिलिटी) लक्ष्य निर्धारित किए हैं. उत्तर-पूर्व भारत पारंपरिक रूप से जैविक रहा है और यहां रसायनों की खपत देश के बाकी हिस्सों की तुलना में बहुत कम है. जनजातीय और द्वीप क्षेत्रों को भी उनके जैविक तरीकों को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है.

जैविक खेती में प्राकृतिक तत्वों जैसे मिट्टी, पानी, जीवाणुओं और अपशिष्ट उत्पादों, वानिकी और कृषि का एकीकरण शामिल है. यह कृषि-आधारित उद्योग के लिए भोजन और कच्चे माल (फीडस्टॉक) की बढ़ती आवश्यकता के कारण प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग के लिए आदर्श पद्धति है. यह सतत विकास लक्ष्य 2 के अनुरूप भी है जिसका उद्देश्य ‘भूख को समाप्त करना, खाद्य सुरक्षा एवं बेहतर पोषण प्राप्त करना और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना है’. भारतीय जैविक किसान अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुपालन में अधिक जागरूकता और क्षमता निर्माण के साथ वैश्विक कृषि व्यापार में अपनी जगह बनाने में सक्षम होंगे.

जैविक खेती को बढ़ावा देने और रसायन मुक्त खेती के लिए केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2015 में दो कार्यक्रमों की शुरुआत की गई थी. इन योजनाओं के नाम हैं मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट (MOVCD) और परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY). वहीं मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट को उत्तर पूर्व के लिए शुरू किया गया है. साथ ही अगर वर्ष 2018 की कृषि निर्यात नीति की बात करें तो इसका उद्देश्य वैश्विक जैविक बाजारों में देश को एक प्रमुख कारोबारी के तौर पर उभारने में मदद करना है. निर्यात में उत्पादों की बात करें तो मुख्य तौर पर इनमें बीज, तिल, सोयाबीन, चाय, औषधीय पौधे, चावल और दालें शामिल हैं. वित्त वर्ष 2018-19 में इनमें वृद्धि भी दर्ज की गई थी. केंद्र द्वारा खुदरा और थोक खरीदारों को भी जैविक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म www.jaivikkheti.in से जोड़ा जा रहा है और उसे मजबूत किया जा रहा है.

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