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18 September 2020

लोकसभा में बैंकिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक 2020 पारित हुआ

लोकसभा में 16 सितम्बर 2020 को बैंकिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2020 को पारित कर दिया गया. लोकसभा में वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक सहकारी बैंकों को नियंत्रित नहीं करता है. सहकारी बैंकों का विनियमन 1965 से ही भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के पास है. 
सहकारी बैंकों को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) के दायरे में लाने के लिए बैंकिंग विनियमन कानून में संशोधन के जरिये सरकार का लक्ष्य इनके कामकाज में सुधार लाना है. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि इन बदलावों से जमाकर्ताओं का पैसा भी सुरक्षित रहेगा.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सदन में विधेयक पेश करते समय बताया कि सहकारी बैंकों का सकल फंसा कर्ज (एनपीए) मार्च, 2019 में 7.27 प्रतिशत था, जो मार्च, 2020 में बढ़कर 10 प्रतिशत से ऊपर चला गया. वित्त वर्ष 2018-19 में 277 शहरी सहकारी बैंक घाटे में रहे थे. मार्च, 2019 के आखिर में 100 से ज्यादा शहरी सहकारी बैंक न्यूनतम पूंजी की नियामकीय शर्त भी पूरी करने में सक्षम नहीं रह गए थे.

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जून 2020 में एक अध्यादेश के जरिये सहकारी बैंकों को रिजर्व बैंक के नियंत्रण में लाने की मंजूरी दी थी. साथ ही वाणिज्यिक बैंकों पर लागू होने वाले प्रावधानों को सहकारी बैंकों पर भी प्रभावी कर दिया गया था. यह विधेयक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को अवश्यकता पड़ने पर सहकारी बैंकों के प्रबंधन में बदलाव करने का अधिकार देता है. इससे सहकारी बैंकों में अपना पैसा जमा करने वाले आम लोगों के हितों की रक्षा होगी.

विधेयक में कहा गया है कि आरबीआई को सहकारी बैंकों के नियमित कामकाज पर रोक लगाये बिना उसके प्रबंधन में बदलाव के लिये योजना तैयार करने का अधिकार मिल जायेगा. कृषि सहकारी समितियां या मुख्य रूप से कृषि क्षेत्र में काम करने वाली सहकारी समितियां इस विधेयक के दायरे में नहीं आयेंगी. वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद के निचले सदन में बिल पर चर्चा के दौरान कहा कि केंद्र सरकार बैंकिंग रेग्‍युलेशन एक्‍ट, 1949 में संशोधन कर बैंक उपभोक्‍ताओं के हितों की रक्षा सुनिश्चित करना चाहती है.

इस बिल में जमाकर्ताओं के हितों की सुरक्षा के लिये बेहतर प्रबंधन और समुचित नियमन के जरिये सहकारी बैंकों को बैकिंग क्षेत्र में हो रहे बदलावों के अनुरूप बनाने का प्रावधान किया गया है. यह विधेयक इससे संबंधित अध्यादेश के स्थान पर लाया गया है.

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