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27 September 2020

केंद्र सरकार ने फेम योजना के तहत 670 इलेक्ट्रिक बसों और 241 चार्जिंग स्टेशनों को मंजूरी दी

केंद्र सरकार ने फेम इंडिया योजना के दूसरे चरण के तहत महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात और चंडीगढ़ के लिए 670 इलेक्ट्रिक बसों की मंजूरी दे दी है. वहीं, केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश, केरल, तमिलनाडु, गुजरात और पोर्ट ब्लेयर में 241 इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशनों का निर्माण शुरू करने की मंजूरी दी है. मंत्रालय ने फेम-2 योजना की अवधि को 31 दिसंबर 2020 तक बढ़ा दिया है. 
केंद्रीय उद्योग मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने 25 सितम्बर 2020 को कहा कि यह फैसला केंद्र की पेट्रोलियम ईंधन पर निर्भरता को कम करने और वाहन से उत्सर्जन के मुद्दे को हल करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पर्यावरणनुकूल सार्वजनिक परिवहन के दृष्टिकोण के भी अनुरूप है. केंद्रीय उद्योग मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि यह अच्छी शुरुआत है. शहरों में ई-बसों, ई-रिक्शा, ई-स्कूटी तथा ई-कारों से पर्यावरण अनुकूल परिवहन को आगे बढ़ाया जा सकता है. 

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने मोदी सरकार की तरफ से फेम इंडिया कार्यक्रम के तहत इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के निर्णय को ऐतिहासिक बताया. केंद्रीय मंत्री जावडेकर ने बताया कि कुल 670 में महाराष्ट्र को 240, गुजरात को 250, चंडीगढ़ को 80 और गोवा को 100 बसें देने का निर्णय लिया गया है. इसी तरह से देश में इलेक्ट्रिकल गाड़ियां बहुत बड़े पैमाने पर चलने लगेंगी. उन्होंने सभी से इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रयोग करने की अपील की. इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना आवश्यक है. उन्होंने  कहा कि विभिन्न राज्यों को पहले ही चार सौ से अधिक बसें दी जा चुकी हैं. केंद्रीय मंत्री जावडेकर के अनुसार कोल्लम के लिए 25 चार्जिंग स्टेशन, तिरुवनंतपुरम के लिए 27, मलप्पुरम (सभी केरल) के लिए 28 चार्जिंग स्टेशनों की मंजूरी दी गई है. पोर्ट ब्लेयर के लिए 10 और तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली के लिए 25 चार्जिंग स्टेशनों को मंजूरी दी गई है.

मोदी सरकार ने देश में इलेक्ट्रिक वाहनों के विनिर्माण और उनके तेजी से इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए 01 अप्रैल 2015 से फेम इंडिया योजना लागू की है. इस योजना का दूसरा चरण 01 अप्रैल 2019 से अगले तीन वर्षों के लिए शुरू हुआ है. इस योजना पर 2021-22 तक कुल 10,000 करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश में इलेक्ट्रिक और हाईब्रिड वाहनों के तेजी से इस्तेमाल को बढ़ावा देना है. इसके लिए लोगों को इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद में शुरूआती स्तर पर प्रोत्साहन राशि देने के साथ ऐसे वाहनों की चार्जिंग के लिए पर्याप्त आधारभूत ढांचा विकसित करना है. केंद्र सरकार का मानना है कि यह योजना पर्यावरण प्रदूषण और ईंधन सुरक्षा जैसी समस्याओं का समाधान करेगी.

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