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10 September 2020

केंद्र सरकार ने विज्ञापनों के लिए दिशानिर्देशों का मसौदा जारी किया, डिस्क्लेमर पर बढ़ेगी सख्ती

केंद्र सरकार ने हाल ही में विज्ञापनों के संबंध में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत प्रस्तावित दिशा-निर्देंशों का एक व्यापक मसौदा जारी किया है. इसमें आसानी से न दिखने वाले या सामान्य उपभोक्ता के लिए समझने में कठिन डिस्क्लेमर को भ्रामक करार दिया जाएगा. इन दिशा निर्देशों के उल्लंघन पर केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्रा​धिकरण की तरफ से कड़ी कार्रवाई की जाएगी. 
इस प्राधिकरण का गठन हाल ही में किया गया है. उपभोक्ता मंत्रालय ने इस मसौदे पर आम लोगों से 18 सितंबर तक सुझाव आमंत्रित किए हैं. मसौदे में कहा गया है कि डिस्क्लेमर साफ, मोटा और पठनीय होना चाहिए. यह खंडन ऐसा हो जिसे कोई सामान्य दृष्टि वाला व्यक्ति एक व्यावहारिक दूरी और व्यावहारिक गति की अवस्था में पढ़ सके. इसे पैकेट पर किसी स्पष्ट रूप से दिखने वाली जगह पर ही प्रकाशित होना चाहिए.

य​दि यह विज्ञापन किसी आवाज या वायस ओवर में सुनाया गया हो, तो उसके साथ लिखित पाठ भी चलाया जाए. यह उसी आकार के फांट तथा भाषा में हो, जिसमें विज्ञापन प्रकाशित किया गया हो. किसी खंडन या अस्वीकारोक्ति में विज्ञापन की किसी भ्रामक बात को शुद्ध करने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए. मसौदे में कहा गया है कि विज्ञापन में किसी माल या सेवा को मुफ्त या ​​नि:शुल्क या इसी तरह की किसी शब्दावली में प्रस्तुत न किया जाए, यदि उपभोक्ता को किसी उत्पाद की खरीद या डिलिवरी के लिए उसकी लागत से कुछ भी अलग भुगतान करना पड़ता हो.

इसमें यह भी कहा है कि विज्ञापन में कपंनी के दावे की पुष्टि के लिए खड़े व्यक्ति को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि कि उसमें कही गयी बातें ठोस हों और उनकी पुष्टि की जा सके. उसे कोई असत्य या भ्रामक बात का प्रचार नहीं करना चाहिए. भ्रामक विज्ञापनों के लिए यह निर्माताओं को 10 लाख रुपये तक का जुर्माना और निर्माताओं को दो साल तक कारावास की सजा दी जा सकती है. यह जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में अनुचित व्यापार प्रथाओं और उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ शिकायतें दर्ज कर सकता है.

इस प्राधिकरण की स्थापना 2020 में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 10 (1) के तहत की गई थी. यह अनुचित व्यापार प्रथाओं और भ्रामक विज्ञापनों को ट्रैक करके उपभोक्ता के अधिकारों की रक्षा करेगा. यह प्राधिकरण उपभोक्ता अधिकारों और अनुचित व्यापार प्रथाओं के उल्लंघन के मामलों की जांच करेगा. यह उन सामानों को वापस बुलाएगा जो खतरनाक या असुरक्षित हैं.

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