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02 October 2020

रक्षा मंत्रालय ने 2,290 करोड़ रुपये के सैन्य उपकरणों की खरीद को मंजूरी दी

रक्षा मंत्रालय ने 28 सितम्बर 2020 को 2,290 करोड़ रुपये के हथियार एवं सैन्य उपकरणों की खरीद को मंजूरी दे दी है. इसमें अमेरिका से लगभग 72,000 सिग सॉअर असॉल्ट राइफलों की खरीद भी शामिल है. रक्षा मंत्रालय चीन के साथ एलएसी पर बढ़ते तनाव के बीच लगातार बड़े फैसले ले रहा है. 
रक्षा खरीद संबंधी निर्णय लेने वाली रक्षा मंत्रालय की सर्वोच्च समिति रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की बैठक में इन खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी गई. रिपोर्ट के अनुसार, डीएसी ने जिन उपकरणों और हथियारों की खरीद को मंजूरी दी है उनमें राइफलों के अलावा वायुसेना एवं नौसेना के लिए करीब 970 करोड़ रुपये में एंटी-एयरफील्ड वेपन (एसएएडब्ल्यू) प्रणाली शामिल हैं.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि नई रक्षा खरीद प्रक्रिया में मेक इन इंडिया के तहत घरेलू रक्षा कंपनियों को ताकत देने की पूरी व्यवस्था की गई है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के विजन के अनुरूप है. इसका मुख्य लक्ष्य भारत को रक्षा क्षेत्र में एक वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनना है. नई खरीद प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए हथियारों और सैन्य साजो-समान को किराए (लीज) पर लेने का विकल्प खोल दिया गया है. इस बदलाव के बाद अब लड़ाकू हेलिकॉप्टर, मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, नौसैनिक जहाज से लेकर युद्धक साजो-समान को देश-विदेश कहीं से भी अनुबंध पर लेने का रास्ता खुल गया है. रक्षा मंत्री के अनुसार, रक्षा क्षेत्र की हाल में ही घोषित प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की नई नीति के मद्देनजर डीएपी-2020 में घरेलू कंपनियों को प्रोत्साहित करने का प्रावधान रखा गया है. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, नये डीएपी के बाद युद्धक हेलिकॉप्टर और सैन्य उपकरण-हथियार, मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, नौसैनिक जहाज आदि किराए पर लिए जा सकेंगे.

रक्षा खरीद की नई प्रक्रिया एक अक्टूबर से लागू हो जाएगी. सीमित संसाधनों की चुनौती के बीच देश की रक्षा और सैन्य साजो-समान की भारी जरूरतों को देखते हुए अनुबंध के विकल्प को खरीद प्रक्रिया के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में शामिल किया गया है. राष्ट्रीय सुरक्षा के हितों से समझौता किए बिना पूंजीगत खर्च में कमी लाने के मकसद से हथियारों और सैन्य साजो-समान को लीज पर लिया जा सकेगा. अभी केवल रूस से नौसैनिक पनडुब्बी लीज पर लिए जाने के अपवाद के अलावा यह विकल्प नहीं था. बता दें कि पिछले साल फरवरी में हुई फास्ट ट्रैक खरीद के तहत भारतीय सेना को पहले ही 72,400 एसआईजी राइफल दी जा चुकी हैं. 7.62x51 मिमी कैलिबर वाली इन रायफल की प्रभावी मारक क्षमता 500 मीटर की है.

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