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29 October 2020

एमी कोनी बैरेट बनीं अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की जज

अमेरिकी राष्ट्रपति पद के चुनाव से लगभग एक सप्ताह पहले 26 अक्टूबर 2020 को अमेरिकी सीनेट में सुप्रीम कोर्ट के नए जज के लिए वोटिंग की गई. इस वोटिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नामित एमी कोनी बैरेट ने जीत दर्ज की और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की नई जज बन गईं. अमेरिकी सीनेट ने वोटिंग के बाद उनकी जीत की पुष्टि की है. 
अमेरिकी राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होने में बहुत ही कम समय रह गया है. जज एमी कोनी बैरेट ने 27 अक्टूबर 2020 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश के रूप में शपथ ली. न्यायाधीश एमी कोनी बैरेट ने राष्ट्रपति ट्रंप की मौजूदगी में व्हाइट हाउस में शपथ ली. उन्हें सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस क्लेरेंस थॉमस ने शपथ दिलाई.

सीनेट के अनुसार, एमी कोनी के पक्ष में 52 वोट और विरोध में 48 वोट पड़े. इसमें किसी भी डेमोक्रेट ने बैरेट के पक्ष में मतदान नहीं किया था. व्हाइट हाउस ने ट्वीट किया कि 'एमी कोनी बैरेट सर्वोच्च न्यायालय के 115वें एसोसिएट जस्टिस होंगी. एमी कोनी बैरेट को यूएस सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति के रूप में शपथ दिलाई गई, वह दिवंगत जस्टिस रूथ बेडर गिन्सबर्ग की जगह लेंगी. व्हाइट हाउस के चीफ ऑफ स्टाफ मार्क मीडोज ने कहा कि 'बैरेट की जीत सुप्रीम कोर्ट में 6-3 से रूढ़िवादी बहुमत को मजबूत करेगा. रिपब्लिकन के लिए यह एक बड़ी जीत है, जिससे दशकों तक उच्च न्यायालय द्वारा किए गए फैसलों पर प्रभाव पड़ेगा.

बता दें कि 87 वर्षीय रूथ बेडर गिन्सबर्ग के निधन के बाद सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस का पद खाली था, हाल ही में उनका कैंसर के कारण निधन हो गया था. आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस के पद पर पहुंचने वाली गिन्सबर्ग दूसरी महिला थीं. अमेरिका में जजों की नियुक्ति लाइफटाइम के लिए होती है और अन्य कोर्ट से अलग यहां के जजों का कोई रिटायरमेंट उम्र भी नहीं होता. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में नौ जज होते हैं. किसी अहम फैसले के समय यदि इनकी राय 4-4 में विभाजित हो जाती है तो सरकार द्वारा नियुक्त जज का वोट निर्णायक हो जाता है.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एमी कोनी बैरट शिकागो में स्थित 7वें यूएस सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स की एक न्यायाधीश हैं. एमी कोनी को अच्छा लेखक भी माना जाता है. एमी कोनी बैरेट को रूढ़िवादी विचारों का माना जाता है. एमी कोनी बैरेट की आजीवन नियुक्ति से आने वाले दशकों के लिए नौ सदस्यीय अदालत में वैचारिक तौर पर रूढ़िवादी बहुमत को मजबूती मिलेगी.

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