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18 December 2020

भारत-बांग्लादेश के बीच 55 साल से बंद रेल लिंक शुरू

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना ने 17 दिसंबर 2020 को भारत-बांग्लादेश वर्चुअल समिट में शिरकत की. दोनों ने संयुक्त रूप से चिल्हटी-हल्दीबाड़ी रेल लिंक का उद्घाटन किया. इसके साथ ही साल 1965 से बंद 6 में से 5 रेल लिंक फिर से शुरू हो जाएंगे. 
बांग्लादेश 1971 में हुए युद्ध में जीत की 50वीं वर्षगांठ मना रहा है. इसी के चलते इस वर्चुअल समिट का आयोजन किया गया. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बांग्लादेश की प्रधानमंत्री ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में खूब हौसला दिखाया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना ने संयुक्त रूप से चिलहटी-हल्दीबाड़ी रेल लिंक को शुरू किया. दोनों देशों के बीच इस सेवा के शुरू होने से रिश्तों की डोर और मजबूत हुई है. दोनों देशों के बीच ढाका से सिलीगुड़ी तक पैसेंजर ट्रेन चलाने की भी योजना है. 7.5 किलोमीटर लंबी रेल लाइन के जरिए वाया बांग्लादेश पश्चिम बंगाल का असम तक संपर्क आसान हो जाएगा. इस ट्रेन के चलने से दोनों देशों के बीच कारोबारी रिश्ते भी मजबूत होंगे. इसके अतिरिक्त टूरिजम को भी बल मिलेगा. हल्दीबाड़ी-चिलाहाटी मार्ग के चालू होने से असम तथा पश्चिम बंगाल से बांग्लादेश के संपर्क को बढ़ावा मिलेगा. इससे रेलवे का नेटवर्क बढ़ेगा तथा द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक विकास को मजबूती मिलेगी. फिलहाल इस रेल संपर्क के चालू होने से माल ढुलाई में सुविधा होगी. जल्द ही बुनियादी ढांचे की व्यवस्था के बाद दोनों तरफ से यात्रियों की आवाजाही भी होने लगेगी.

भारत और बांग्लादेश के बीच कोलकाता से ढाका तक एक रेल सेवा पहले से ही चलती है. मैत्री और बंधन एक्सप्रेस सेवा दोनों देशों को आपस में जोड़ती है. मैत्री एक्सप्रेस का परिचालन कोलकाता से ढाका के बीच जबकि बंधन एक्सप्रेस कोलकाता से खुलना शहर के बीच चलती है. इस रूट पर यात्री ट्रेन सेवा शुरू होने से कोलकाता से जलपाईगुड़ी जाने वाले लोगों केवल सात घंटे का समय लगेगा. पहले समय 12 घंटे लगता था यानी 5 घंटे की बचत होगी. गुवाहाटी के मालीगांव में स्थित एनईएफ का मुख्यालय पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र और बिहार और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों को कवर करता है.

चिल्हटी-हल्दीबाड़ी रेल लिंक: चिल्हटी-हल्दीबाड़ी रेल लिंक भारत और बांग्लादेश के बीच हैं. ये फिर से शुरू किया गया है. ये लिंक भारत-पाकिस्तान के बीच हुई साल 1965 की लड़ाई के समय बंद किया गया था. इस लिंक के शुरू होने से बांग्लादेश से असम, बंगाल के बीच कनेक्टिविटी बेहतर हो सकेगी. शुरुआत में इस लिंक का इस्तेमाल सामान लाने-जाने के लिए किया जाएगा, बाद में पैसेंजर सेवा शुरू हो सकती है.

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