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04 December 2020

भारतीय नौसेना ने ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल का किया सफल परीक्षण

भारतीय नौसेना ने 1 दिसंबर, 2020 को बंगाल की खाड़ी में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के नेवल वर्जन का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है. अधिकारियों के अनुसार, यह परीक्षण एक ऐसी परीक्षण श्रृंखला का हिस्सा था जो भारत की तीनों सेनाओं द्वारा किया जा रहा है. 
ब्रह्मोस मिसाइल का इसी तरह का एक परीक्षण भारतीय नौसेना द्वारा अक्टूबर, 2020 में अरब सागर में किया गया था. ब्रह्मोस का 01 दिसंबर, 2020 को किया गया यह परीक्षण नौसेना के अधिकारी के अनुसार सफल रहा.

ब्रह्मोस एयरोस्पेस का संचालन भारत-रूसी सहयोग से हो रहा है. यह ऐसे सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का उत्पादन करता है जिसे विमान, जहाज, पनडुब्बियों या भू-क्षेत्र से सफलतापूर्वक लॉन्च किया जा सकता है. ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल दुनिया में अपनी किस्म का सबसे तेज ऑपरेटिंग सिस्टम भी है. DRDO ने हाल ही में इस मिसाइल प्रणाली की मारक क्षमता को मौजूदा 298 किमी से बढ़ाकर 450 किमी कर दिया है. 300 किमी की स्ट्राइक रेंज वाली इस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के एंटी-शिप वर्जन ने अपने लक्ष्य जहाज को इस परिक्षण में सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया था. इस मिसाइल का लक्ष्य बंगाल की खाड़ी में कार-निकोबार द्वीप समूह के पास तैनात किया गया था. रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन-DRDO द्वारा विकसित की गई इस मिसाइल को भारतीय नौसेना के INS रणविजय द्वारा लॉन्च किया गया था.

नवंबर 2020 में, ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का एक लैंड-अटैक वर्जन का परीक्षण अंडमान और निकोबार द्वीप समूह क्षेत्र से किया गया था जोकि सफल रहा था. ब्रह्मोस मिसाइल के लैंड-अटैक वर्जन की मारक क्षमता, जो पहले 290 किमी थी, वह भी 400 किमी तक बढ़ा दी गई है. भारत ने एक एंटी-रेडिएशन मिसाइल रुद्रम -1 का परीक्षण भी किया है, जिसे वर्ष 2022 तक सेना में शामिल किया जा सकता है. 30 अक्टूबर, 2020 को, भारतीय वायु सेना ने बंगाल की खाड़ी में एक सुखोई लड़ाकू विमान से ब्रह्मोस मिसाइल के एयर-लॉन्च्ड वर्जन का परीक्षण किया था. भारतीय-वायु सेना 40 से अधिक सुखोई लड़ाकू जेट्स पर ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को तैनात कर रही है, जिसका उद्देश्य बल की समग्र लड़ाकू क्षमता को बढ़ाना है.

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