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19 February 2021

कैबिनेट ने भारत और मॉरीशस के बीच व्यापक आर्थिक सहयोग एवं साझेदारी समझौते को मंजूरी दी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मॉरीशस के साथ व्यापक आर्थिक सहयोग एंव भागीदारी समझौता (सीईसीपीए) किये जाने के प्रस्ताव को 17 फरवरी 2021 को मंजूरी दी. इसके तहत कृषि, कपड़ा, इलेक्ट्रानिक्स एवं अन्य क्षेत्रों के 300 से अधिक घरलेू उत्पादों को मॉरिशस के बाजार में रियायती सीमा शुल्क पर प्रवेश मिलेगा. 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई. बैठक के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने संवाददाताओं को भारत-मॉरीशस सीईसीपीए के प्रसताव को मंजूर किए जाने की जानकारी दी.

सरकार के एक बयान के मुताबिक यह अफ्रीकी क्षेत्र के किसी देश के साथ भारत का यह पहला समझौता है. इसके दायरे में वस्तु और सेवाओं का व्यापार, व्यापार में तकनीकी बाधाओं (टीबीटी) के समाधान, स्वच्छता और पादप स्वच्छता (एसपीएस) उपायों, विवाद निपटान, नागरिकों के आवागमन, दूरसंचार, वित्तीय सेवाओं, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं और अन्य क्षेत्रों में परस्पर सहयोग जैसे विषय आयेंगे. इसमें कहा गया है कि सीईसीपीए दोनों देशों के बीच व्यापार को प्रोत्साहित करने तथा बेहतर बनाने हेतु एक संस्थागत तंत्र प्रदान करता है.

भारत और मॉरीशस के बीच सीईसीपीए में भारत के लिए 310 निर्यात वस्तुओं को शामिल किया गया है. इसमें खाद्य सामग्री और पेय पदार्थ (80 श्रृंखला), कृषि उत्पाद (25 श्रृंखला), वस्त्र और वस्त्र उत्पाद (27 श्रृंखला), आधार धातु और इनसे बने उत्पाद (32 श्रृंखला), बिजली और इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद (13 श्रृंखला), प्लास्टिक और रसायन (20 श्रृंखला), लकड़ी तथा लकड़ी से बने सामान (15 श्रृंखला) और अन्य शामिल हैं.

मॉरीशस को अपने 615 उत्पादों के लिए प्राथमिकता की आधार पर भारतीय बाजार में पहुंच से लाभ मिलेगा. इनमें फ्रोजेन फिश, विशेष प्रकार की चीनी, बिस्कुट, ताजे फल, जूस, मिनरल वाटर, बीयर, मादक पेय, साबुन, बैग, चिकित्सा और शल्य-चिकित्सा उपकरण और परिधान शामिल हैं. गौरतलब है कि भारत, 2005 के बाद से, मॉरीशस के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक रहा है और वहां माल और सेवाओं के सबसे बड़े निर्यातकों में प्रमुख रहा है. भारत ने साल 2016 में मॉरीशस को 35.3 करोड़ डॉलर का 'विशेष आर्थिक पैकेज' दिया था.

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