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18 February 2021

पीएम मोदी ने किया महाराजा सुहेलदेव के स्मारक का शिलान्यास

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 फरवरी 2021 को उत्तर प्रदेश के बहराइच में महाराजा सुहेलदेव के स्मारक का शिलान्यास किया. इस दौरान कार्यक्रम में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे. प्रधानमंत्री ने बहराइच की चित्‍तौरा झील के विकास कार्यों का भी शिलान्‍यास किया. 
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि आज मुझे बहराइच में महाराजा सुहेलदेव जी के भव्य स्मारक के शिलान्यास का सौभाग्य मिला है. उन्होंने कहा कि ये आधुनिक और भव्य स्मारक, ऐतिहासिक चित्तौरा झील का विकास, बहराइच पर महाराजा सुहेलदेव के आशीर्वाद को बढ़ाएगा और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा.

प्रधानमंत्री मोदी (PM मोदी) वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बहराइच की चित्तौरा झील के विकास कार्यों का शिलान्यास किये. यह कार्यक्रम महाराजा सुहेलदेव की जयंती के मौके में उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में आयोजित किया गया है. इस दौरान मुख्‍यमंत्री ने कहा कि बहराइच के लिए आज महत्वपूर्ण दिन है. आज से लगभग एक हजार वर्ष पूर्व विदेशी आक्रांत से इस धरती को पूरी तरह से सुरक्ष‍ित करने के लिए अपने शौर्य पराक्रम का प्रर्दशन इस धरती पर करने वाले धर्मरक्षक, राष्ट्र नारक महाराजा सुहेलदेव की जंयती का कार्यक्रम भी है.

इसमें महाराजा सुहेलदेव की एक घोड़े पर सवार प्रतिमा की स्‍थापना, कैफेटेरिया, अतिथि गृह और बच्‍चों के पार्क जैसी विभिन्‍न पर्यटक सुविधाओं को शामिल किया गया है. प्रधानमंत्री ने दावा किया कि बहराइच जैसे विकास के आकांक्षी जिले में स्वास्थ सुविधाएं बढ़ना यहां के रहने वालों के जीवन को आसान बनाएगा. इसका लाभ आसपास के जिले श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर को तो होगा ही साथ ही साथ ही नेपाल से आने वाले मरीजों को भी मदद करेगा. उन्होंने कहा कि महाराजा सुहेलदेव जी के नाम पर बनाए गए मेडिकल कॉलेज को एक नया और भव्य भवन भी मिला है.

महाराजा सुहेलदेव 11वीं सदी में श्रावस्ती के सम्राट थे. सुहेलदेव ने महमूद गजनवी के भांजे सालार मसूद को मारा था. राजभर और पासी जाति के लोग उन्हें अपना वंशज मानते हैं. जिनका पूर्वांचल के कई जिलों में खास प्रभाव है. आपको बता दें कि 15 जून 1033 को श्रावस्ती के राजा सुहेलदेव और सैयद सालार मसूद के बीच बहराइच के चित्तौरा झील के तट पर युद्ध हुआ था. इस लड़ाई में सुहेलदेव की सेना ने सालार मसूद की सेना को पूरी तरह नष्ट कर दिया था. सुहेलदेव किस जाति के थे, इसकी प्रमाणिक और पुष्ट जानकारी इतिहासकारों के पास नहीं है. सियासी लोग राजा सुहेलदेव को अपनी अपनी जाति के हिसाब प्रयोग करते हैं. कुछ लोग उन्हें राजभर तो कुछ लोग उन्हें पासी बताते हैं.

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