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17 June 2021

भारतवंशी सत्या नडेला बने माइक्रोसॉफ्ट के चेयरमैन

सॉफ्टवेयर बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने सत्या नडेला को चेयरमैन नियुक्त किया है. भारतीय मूल के नडेला पिछले सात साल से कंपनी के सीईओ हैं. उनके नेतृत्व में कंपनी ने नई बुलंदियों को छुआ है. 
सत्या नडेला अब जॉन थॉमसन की जगह लेंगे जो एक बार फिर लीड इंडिपेंडेंट डायरेक्टर (Lead Independent Director) की भूमिका में वापस लौटेंगे. जॉन थॉमसन को साल 2014 में चेयरमैन बनाया गया था. वे उससे पहले कंपनी के बोर्ड में लीड इंडिपेंडेंट डायरेक्टर थे. नडेला कंपनी के तीसरे सीईओ हैं और कंपनी के इतिहास में तीसरे चेयरमैन होंगे. इससे पहले बिल गेट्स और थॉमसन कंपनी के चेयरमैन रह चुके हैं. नडेला से पहले स्टीव बाल्मर कंपनी के सीईओ रहे.  कंपनी ने एक बयान में कहा कि 72 साल के थॉमसन लीड इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के तौर पर एक्टिव रहेंगे और नडेला के कंपनसेशन, सक्सेशन प्लानिंग, गवर्नेंस और बोर्ड ऑपरेशंस देखेंगे.

सत्या नडेला को साल 2014 में माइक्रोसॉफ्ट का सीईओ बनाया गया था. जब उन्होंने यह पद संभाला था तो कंपनी कई तरह की परेशानियों से गुजर रही थी. नडेला ने न सिर्फ माइक्रोसॉफ्ट को इन परेशानियों से बाहर निकाला बल्कि उसे नई बुलंदियों तक पहुंचाया. उन्होंने क्लाउड कंप्यूटिंग, मोबाइल ऐप्लिकेशनंस और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर फोकस किया और साथ ही ऑफिस सॉफ्टवेयर फ्रेंजाईजी में भी नई जान फूंकी. सत्या नडेला के कार्यकाल के दौरान माइक्रोसॉफ्ट के शेयरों की कीमत में सात गुना से अधिक इजाफा हुआ और कंपनी का मार्केट कैप 2 लाख करोड़ डॉलर के करीब पहुंच गया.

सत्या नडेला का जन्म भारत के हैदराबाद में साल 1967 में हुआ था. उनके पिता एक प्रशासनिक अधिकारी और मां संस्कृत की लेक्चरर थीं. उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा हैदराबाद पब्लिक स्कूल से करने के बाद साल 1988 में मनिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और इसके बाद कंप्यूटर साइंस में एमएस करने के लिए अमेरिका चले गए. उन्होंने 1996 में शिकागो के बूथ स्कूल ऑफ बिजनस से एमबीए किया.

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