मासिक करेंट अफेयर्स

20 July 2021

पटना में बनेगा एशिया का पहला राष्ट्रीय डॉल्फिन अनुसंधान केंद्र

भारत और एशिया का पहला राष्ट्रीय डॉल्फिन अनुसंधान केंद्र (NDRC) बिहार राज्य के पटना विश्वविद्यालय परिसर में गंगा नदी के तट पर स्थापित किया जाएगा. मानसून के मौसम के बाद इस केंद्र पर काम शुरू होने की उम्मीद है. 
विशेषज्ञों की टीमों द्वारा गंगा नदी में वर्ष, 2018-19 में किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, इस नदी में लगभग 1,455 डॉल्फ़िन देखी गईं. इस प्रोजेक्ट डॉल्फ़िन का उद्देश्य देश की नदियों और महासागरों में डॉल्फ़िन का संरक्षण और सुरक्षा करना है. यह परियोजना, विशेष रूप से अवैध शिकार विरोधी गतिविधियों और गणना में आधुनिक तकनीक के उपयोग के माध्यम से डॉल्फ़िन और जलीय आवास के संरक्षण को शामिल करेगी.

इस राष्ट्रीय डॉल्फिन अनुसंधान केंद्र की स्थापना गंगा नदी की डॉल्फिन के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है. यह केंद्र पटना विश्वविद्यालय के भीतर 4400 वर्ग मीटर भूमि पर स्थापित किया जाएगा और यह केंद्र गंगा नदी से करीब 200 मीटर की दूरी पर होगा. इस केंद्र के वर्ष 2022 तक स्थापित होने की उम्मीद है. शुरू में वर्ष, 2011 में यह परियोजना प्रस्तावित की गई थी. यह राष्ट्रीय डॉल्फिन अनुसंधान केंद्र लुप्तप्राय गंगा डॉल्फिन के संरक्षण के प्रयासों को बढ़ावा देगा और डॉल्फ़िन के बदलते व्यवहार, भोजन की आदतों, उत्तरजीविता कौशल, मृत्यु के कारण और अन्य पहलुओं सहित इन डॉलफिन्स पर गहन शोध को सक्षम करेगा.

गंगा की डॉल्फिन भारत का राष्ट्रीय जलीय जंतु है. यह दुनिया की चार मीठे पानी की डॉल्फ़िन प्रजातियों में से एक है. अन्य तीन मीठे पानी की डॉल्फ़िन प्रजातियां चीन की यांग्त्ज़ी नदी (अब विलुप्त), पाकिस्तान की सिंधु नदी और दक्षिण अमेरिका की अमेज़ॅन नदी में पाई जाती हैं. गंगा की डॉल्फिन मुख्य रूप से भारतीय उपमहाद्वीप, खासकर गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना और कर्णफुली-सांगू नदियों में पाई जाती है. डॉल्फ़िन्स कम से कम 05 फीट से 08 फीट गहरा पानी पसंद करती हैं. ये आमतौर पर अशांत पानी में पाई जाती हैं, जहां इनके पास खाने के लिए पर्याप्त मछलियां होती हैं. बिहार में देश की अनुमानित 3,000 डॉल्फ़िन आबादी का लगभग आधा हिस्सा है.

No comments:

Post a Comment