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18 October 2021

ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत 116 देशों में 101वें स्थान पर

ग्लोबल हंगर इंडेक्स ने भारत को कुल 116 देशों में से 101वें स्थान पर रखा है. भारत भी उन 31 देशों में शामिल है जहां भूख की समस्या को काफी गंभीर रूप में पहचाना गया है. पिछले साल जारी ग्लोबल हंगर इंडेक्स (GHI) में कुल 107 देशों में से भारत 94वें स्थान पर था. 
इस ग्लोबल हंगर इंडेक्स के मुताबिक, केवल 15 देशों की स्थिति ही भारत से बदतर है. इनमें पापुआ न्यू गिनी (102), अफगानिस्तान (103), नाइजीरिया (103), कांगो (105), मोजाम्बिक (106), सिएरा लियोन (106), तिमोर-लेस्ते (108), हैती (109), लाइबेरिया (110)), मेडागास्कर (111), कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (112), चाड (113), मध्य अफ्रीकी गणराज्य (114), यमन (115) और सोमालिया (116) के नाम शामिल हैं.

इस ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत अपने अधिकांश पड़ोसी देशों से भी पीछे रहा जिसमें, पाकिस्तान को 92वें, नेपाल को 76वें और बांग्लादेश को 76वें स्थान पर रखा गया है. ग्लोबल हंगर इंडेक्स (GHI) पर आधारित वर्तमान अनुमानों से यह पता चलता है कि, वर्ष, 2030 तक पूरी दुनिया - और विशेष रूप से 47 देश - कम भूख के लक्ष्य को भी हासिल करने में विफल रहेंगे.

ग्लोबल हंगर इंडेक्स राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और वैश्विक स्तरों पर वर्ष, 2030 तक शून्य भूख की दिशा में प्रगति को मापने के लिए उपयोग किए जाने वाले प्रमुख संकेतकों को ट्रैक करता है. चार संकेतकों के मूल्यों के आधार पर - अल्पपोषण, बच्चे की आयु के मुताबिक कम भार, बच्चे की आयु के मुताबिक कम लंबाई और बाल मृत्यु दर - GHI 100 बिंदु पैमानों पर भूख का निर्धारण करता है, जहां 0 सबसे अच्छा संभव स्कोर (भूख नहीं) है और 100 सबसे खराब स्कोर है. प्रत्येक देश के GHI स्कोर को उस देश में भूख की समस्या - निम्न से लेकर अत्यंत खतरनाक स्तर तक - की गंभीरता के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है.

वर्ष, 2021 की GHI रैंकिंग के अनुसार, सोमालिया में भूख का उच्चतम स्तर है - इसका GHI स्कोर 50.8 बेहद खतरनाक माना जाता है, यह भूख के स्तर वाले पांच देशों - मध्य अफ्रीकी गणराज्य, चाड, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, मेडागास्कर, और यमन - से अधिक है जो भूख के खतरनाक स्तर पर हैं और अन्य ऐसे 31 देश जिनमें भूख की समस्या काफी गंभीर स्तर पर है.

रिपोर्ट यह कहती है कि, "हालांकि GHI के स्कोर यह बताते हैं कि वर्ष, 2000 के बाद से वैश्विक भूख कम हो रही है लेकिन, इसकी प्रगति धीमी है. जबकि दुनिया के लिए GHI स्कोर 4.7 अंक गिर गया है, वर्ष, 2006 और वर्ष, 2012 के बीच यह स्कोर 25.1 से 20.4 तक गिरा और फिर वर्ष, 2012 के बाद से यह स्कोर सिर्फ 2.5 अंक के स्तर तक गिर गया है. कई दशकों की गिरावट के बाद, अल्पपोषण का वैश्विक प्रसार - जोकि GHI की गणना के लिए उपयोग किए जाने वाले चार संकेतकों में से एक मानदंड है - बढ़ रहा है. यह बदलाव भूख के अन्य उपायों में उलटफेर का अग्रदूत (एक बड़ा कारण) हो सकता है”.

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