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29 October 2021

बख्तियारपुर नाम नहीं एक कलंक है बिहार के माथे पर

बख्तियारपुर बिहार का एक शहर है जो पटना जिले में पड़ता है. इस शहर को तुर्क आक्रमणकारी बख्तियार खिलजी ने बसाया था. उसका पूरा नाम इख्तियारुद्दीन मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी था. बिहार का वह मुगल शासक था. उस समय दिल्ली के बादशाह कुतुबुद्दीन एबक ने यूपी के मिर्जापुर की जिम्मेदारी बख्तियार खिलजी को दिया था. यूपी से बिहार और बंगाल नजदीक होने के कारन उसका नजर बिहार और बंगाल पर पड़ा और वह पुरे बिहार पर अधिकार कर लिया. एक समय बख्तियार खिलजी बहुत ज्यादा बीमार पड़ गया. उसके हकीमों ने इसका काफी उपचार किया पर कोई फायदा नहीं हुआ. तब उसे नालंदा विश्वविद्यालय के आयुर्वेद विभाग के प्रमुख आचार्य राहुल श्रीभद्रजी से उपचार कराने की सलाह दी गई. उसने आचार्य राहुल को बुलवा लिया तथा इलाज से पहले शर्त लगा दी की वह किसी हिंदुस्तानी दवाई का सेवन नहीं करेगा. उसके बाद भी उसने कहा कि अगर वह ठीक नहीं हुआ तो आचार्य की हत्या करवा देगा.


अगले दिन आचार्य उसके पास कुरान लेकर गए और कहा कि कुरान की पृष्ठ संख्या इतने से इतने तक पढिए ठीक हो जाएंगे. उसने पढ़ा और ठीक हो गया. खिलजी के ठीक होने के जो वजह बताई जाती है वह यह है कि वैद्यराज राहुल श्रीभद्र ने कुरान के कुछ पृष्ठों के कोने पर एक दवा का अदृश्य लेप लगा दिया था. वह थूक के साथ मात्र दस बीस पेज चाट गया और ठीक हो गया. उसको खुशी नहीं हुई उसको बहुत गुस्सा आया कि उसके हकीमों से इन भारतीय वैद्यों का ज्ञान श्रेष्ठ क्यों है. बौद्ध धर्म और आयुर्वेद का एहसान मानने के बदले उसने भारत से आयुर्वेद को समाप्त करने के लिए 1199 में नालंदा विश्वविद्यालय में ही आग लगवा दी. वहां इतनी पुस्तकेंं थीं कि आग लगी भी तो तीन माह तक पुस्तकेंं जलती रहीं. उसने हजारों धर्माचार्य और बौद्ध भिक्षु मार डाले.  उसने इस एहसान का बदला नालंदा को जलाकर दिया और आज भी उसके नाम पर बख्तियारपुर शहर है इसलिए कहा जाता है की बख्तियारपुर एक कलंक है बिहार के माथे पर.

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