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17 November 2021

देखिए जम्बूद्वीप से अखंड भारत कैसे बना और फिर टुकड़े-टुकड़े में खंडित कैसे हुआ

अखंड बोलना इसलिए पड़ता है क्योंकि सबकुछ खंड-खंड हो चला है. जम्बूद्वीप से छोटा है भारतवर्ष. भारतवर्ष में ही आर्यावर्त स्थित था. आज न जम्बूद्वीप है न भारतवर्ष और न आर्यावर्त. आज सिर्फ हिन्दुस्थान है और सच कहें तो यह भी नहीं. आओ जानते हैं भारतवर्ष के बनने की कहानी:
इंद्र के बाद व्यवस्थाएं बदली और स्वायंभुव मनु संपूर्ण धरती के शासन बने. उनके काल में धरती सात द्वीपों में बंटी हुई थी. जम्बू, प्लक्ष, शाल्मली, कुश, क्रौंच, शाक एवं पुष्कर. इसमें से जम्बू द्वीप सभी के बीचोबीच स्थित है. जिसमें से सिर्फ जम्बूद्वीप पर ही अधिकांश आबादी रहती थी. बाकी द्वीपों पर नाम मात्र के ही जीव रहते थे. स्वायंभुव मनु के बाद उनके पुत्र प्रियव्रत धरती के राजा बने. राजा प्रियव्रत ने विश्वकर्मा की पुत्री बहिर्ष्मती से विवाह किया था जिनसे आग्नीध्र, यज्ञबाहु, मेधातिथि आदि 10 पुत्र उत्पन्न हुए. प्रियव्रत की दूसरी पत्नी से उत्तम, तामस और रैवत ये 3 पुत्र उत्पन्न हुए, जो अपने नाम वाले मन्वंतरों के अधिपति हुए.

 महाराज प्रियव्रत के 10 पुत्रों में से कवि, महावीर तथा सवन ये 3 नैष्ठिक ब्रह्मचारी थे और उन्होंने संन्यास धर्म ग्रहण किया था. राजा प्रियव्रत ने धरती का विभाजन कर अपने 7 पुत्रों को अलग-अलग द्वीप का शासक बना दिया. आग्नीध्र को जम्बूद्वीप मिला. वृद्धावस्था में आग्नीध्र ने अपने 9 पुत्रों को जम्बूद्वीप के विभिन्न 9 स्थानों का शासन का दायित्व सौंपा. जम्बूद्वीप के 9 देश थे- इलावृत, भद्राश्व, किंपुरुष, नाभि (भारत), हरि, केतुमाल, रम्यक, कुरु और हिरण्यमय. .इन 9 पुत्रों में सबसे बड़े थे नाभि जिन्हें हिमवर्ष का भू-भाग मिला. इन्होंने हिमवर्ष को स्वयं के नाम अजनाभ से जोड़कर अजनाभवर्ष प्रचारित किया. यह हिमवर्ष या अजनाभवर्ष ही प्राचीन भारत देश था. राजा नाभि के पुत्र थे ऋषभ. ऋषभदेव के 100 पुत्रों में भरत ज्येष्ठ एवं सबसे गुणवान थे. उनके नाम पर इस देश का नाम भरत पड़ा.

प्राचीनकाल में यह अखंड भारतवर्ष हिन्दूकुश पर्वत माला से अरुणाचल और अरुणाचल से बर्मा, इंडोनेशिया तक फैला था. दूसरी ओर यह कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी-श्रीलंका तक और हिन्दूकुश से नीचे सिंधु के अरब सागर में मिलने तक फैला था. यहां की प्रमुख नदियां सिंधु, सरस्वती, गंगा, यमुना, कुम्भा, ब्रह्मपुत्र, कृष्णा, कावेरी, नर्मदा, महानदी, शिप्रा आदि हैं. 16 जनपदों में बंटे इस क्षेत्र को भारतवर्ष कहते हैं. समुद्र के उत्तर तथा हिमालय के दक्षिण में भारतवर्ष स्थित है. इसका विस्तार 9 हजार योजन है. इसमें 7 कुल पर्वत हैं : महेन्द्र, मलय, सह्य, शुक्तिमान, ऋक्ष, विंध्य और पारियात्र. 

भारत में कई छोटे और बड़े युद्ध होते रहे. जैसे, देवासुर संग्राम, इंद्र और वृत्तासुर युद्ध, दाशराज्ञ का युद्ध, हैहय-परशुराम युद्ध, राम-रावण का युद्ध, चंद्रगुप्त मौर्य-धननंद का युद्ध, सम्राट अशोक-कलिंग का युद्ध. लेकिन उक्त सभी युद्ध के दौरान भारत को अंखंड किए जाने का कार्य ही किया जाता रहा. हालांकि सिकंदर और पोरस युद्ध के बाद भारत में स्थितियां बदलती गई. अखंड भारत खंड-खंड होता चला गया. अखंड भारत में आज के अफगानिस्थान, पाकिस्तान , तिब्बत, भूटान, म्यांमार, बांग्लादेश, श्रीलंका आते है केवल इतना ही नहीं कालांतर में भारत का साम्राज्य में आज के मलेशिया, फिलीपीन्स, थाईलैण्ड, दक्षिण वियतनाम, कम्बोडिया ,इण्डोनेशिया आदि में सम्मिलित थे.

 सन् 1875 तक (अफगानिस्थान, पाकिस्तान , तिब्बत, भूटान, म्यांमार, बांग्लादेश, श्रीलंका) भारत का ही हिस्सा थे लेकिन 1857 की क्रांति के पश्चात ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिल गई थी उन्हें लगा की इतने बड़े भू-भाग का दोहन एक केन्द्र से करना सम्भव नहीं है एवं फुट डालो एवं शासन करो की नीति अपनायी एवं भारत को अनेकानेक छोटे-छोटे हिस्सो में बाँट दिया केवल इतना ही नहीं यह भी सुनिश्चित किया की कालान्तर में भारतवर्ष पुनः अखण्ड न बन सके. विघटन की इस शृंखला का प्रारम्भ अफ़गानिस्तान से हुआ जब सन् 1876 में रूस एवं ब्रिटैन के बीच हुई गण्डामक सन्धि के बाद अफ़गानिस्तान बना.

कब क्या खोया भारतवर्ष नें :
अफ़गानिस्तान अलग हुआ 1876 में 
भूटान अलग हुआ 1906 में 
श्रीलंका अलग हुआ 1935 में 
पाकिस्तान अलग हुआ 1947 में 
बंग्लादेश अलग हुआ 1971 में 
बर्मा(म्यामार) अलग हुआ 1937 में 

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