11 December 2021

मगध पर पालवंश की स्थापना



पालवंश पूर्व मध्यकालीन राजवंश था 
जिन्होंने मगध पर 750ई. से लेकर 1174 ई. तक शासन किया. जब हर्षवर्धन काल के बाद समस्त उत्तरी भारत में राजनीतिक, सामाजिक एवं आर्थिक गहरा संकट उत्पन६न हो गया, तब बिहार, बंगाल और उड़ीसा के सम्पूर्ण क्षेत्र में पूरी तरह अराजकत फैली थी. इसी समय गोपाल ने बंगाल में एक स्वतन्त्र राज्य घोषित किया. जनता द्वारा गोपाल को सिंहासन पर आसीन किया गया था. वह योग्य और कुशल शासक था, जिसने 750 ई. से 770 ई. तक शासन किया. इस दौरान उसने औदंतपुरी (बिहार शरीफ) में एक मठ तथा विश्‍वविद्यालय का निर्माण करवाया. पाल शासक बौद्ध धर्म को मानते थे. आठवीं सदी के मध्य में पूर्वी भारत में पाल वंश का उदय हुआ. गोपाल को पाल वंश का संस्थापक माना जाता है.

गोपाल के बाद उसका पुत्र धर्मपाल 770 ई. में सिंहासन पर बैठा. धर्मपाल ने 40 वर्षों तक शासन किया. धर्मपाल ने कन्‍नौज के लिए त्रिदलीय संघर्ष में उलझा रहा. उसने कन्‍नौज की गद्दी से इंद्रायूध को हराकर चक्रायुध को आसीन किया. चक्रायुध को गद्दी पर बैठाने के बाद उसने एक भव्य दरबार का आयोजन किया तथा उत्तरापथ स्वामिन की उपाधि धारण की. धर्मपाल बौद्ध धर्मावलम्बी था. उसने काफी मठ व बौद्ध विहार बनवाये. उसने भागलपुर जिले में स्थित विक्रमशिला विश्‍वविद्यालय का निर्माण करवाया था. उसके देखभाल के लिए सौ गाँव दान में दिये थे. उल्लेखनीय है कि प्रतिहार राजा नागभट्ट द्वितीय एवं राष्ट्रकूट राजा ध्रुव ने धर्मपाल को पराजित किया था.

धर्मपाल के बाद उसका पुत्र देवपाल गद्दी पर बैठा. इसने अपने पिता के अनुसार विस्तारवादी नीति का अनुसरण किया. इसी के शासनकाल में अरब यात्री सुलेमान आया था. उसने मुंगेर को अपनी राजधानी बनाई. उसने पूर्वोत्तर में प्राज्योतिषपुर, उत्तर में नेपाल, पूर्वी तट पर उड़ीसा तक विस्तार किया. कन्‍नौज के संघर्ष में देवपाल ने भाग लिया था. उसके शासनकाल में दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ भी मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध रहे. उसने जावा के शासक बालपुत्रदेव के आग्रह पर नालन्दा में एक विहार की देखरेख के लिए 5 गाँव अनुदान में दिए. देवपाल ने 850ई. तक शासन किया था.

देवपाल के बाद पाल वंश की अवनति प्रारम्भ हो गयी. मिहिरभोज और महेन्द्रपाल के शासनकाल में प्रतिहारों ने पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के अधिकांश भागों पर अधिकार कर लिया. 11वीं सदी में महीपाल प्रथम ने शासन किया. महीफाल को पाल वंश का द्वितीय संस्थापक कहा जाता है. उसने समस्त बंगाल और मगध पर शासन किया. महीपाल के बाद पाल वंशीय शासक निर्बल थे जिससे आन्तरिक द्वेष और सामन्तों ने विद्रोह उत्पन्‍न कर दिया था. गोविन्द पाल, पाल राजवंश के अंतिम राजा थे. उन्होंने 1162 से 1174 तक बंगाल पर राज किया. इसके बाद बंगाल पर सेन राजवंश का शासन प्रारंभ हुआ.

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