18 December 2021

भारत पर महमूद गजनवी का आक्रमण

महमूद गजनवी गजनी का प्रमुख शासक था जिसने 997 से 1030 तक शासन किया.  वह सुबक्त्गीन का पुत्र था. भारत की धन-संपत्ति से आकर्षित होकर, गजनवी ने भारत पर कई बार आक्रमण किए. वास्तव में गजनवी ने भारत पर 17 बार आक्रमण किया. उसके आक्रमण का मुख्य मकसद भारत की संपत्ति को लूटना था.
 महमूद गजनी ने पहली बार 1001 ईस्वी में आधुनिक अफ़्गानिस्तान और पाकिस्तान पर हमला किया था. इसने हिन्दू शासक जयपाल को पराजित किया जिसने बाद में आत्महत्या कर ली और उसका पुत्र आनंदपाल उसका उत्तराधिकारी बना.

गजनी ने भाटिया पर 1005 ईस्वी में और मुल्तान पर 1006 ईस्वी में हमला किया. इसी दौरान आनंदपाल ने उस पर हमला किया. गजनी के महमूद ने भटिंडा के शासक सुखपाल पर 1007 ईस्वी में हमला किया और उसे कुचल दिया. गजनी ने पंजाब के पहाड़ियों में नगरकोट पर 1011 ईस्वी  में हमला किया. महमूद ने, आनंदपाल के शाही राज्य पर आक्रमण किया और उसे वैहिंद के युद्ध में, पेशावर के निकट हिन्द शाही राजधानी में 1013 ईस्वी में हरा दिया. गजनी के महमूद ने 1014 ईस्मेंवी  थानेसर पर और 1015 ईस्वी  में कश्मीर पर आक्रमण किया. इसने 1018 ईस्वी  में मथुरा पर आक्रमण किया और शासकों के गठबंधन को हरा दिया, जिसमे चन्द्रपाल नाम का शासक भी था.

महमूद ने 1021 ईस्वी में कनौज के राजा चन्देल्ला गौड़ को हराकर, कनौज को जीत लिया. महमूद गजनी के द्वारा ग्वालियर पर 1023 ईस्वी में हमला हुआ और उस पर कब्जा कर लिया. महमूद गजनी ने 1025 ईस्वी में सोमनाथ मंदिर पर हमला किया ताकि मंदिर के अंदर की धन संपत्ति को लूट कर एकत्रित कर सके. अपने आखिरी आक्रमण के दौरान मलेरिया के कारण महमूद गजनवी की 1030 AD में मृत्यु हो गई.

महमूद गजनवी  भारत की अधिक धन संपत्ति से आकर्षित था. इसी कारण उसने भारत पर एक के बाद एक हमले किए. इसने भारत पर आक्रमण के दौरान धार्मिक आयाम को भी जोड़ा. गजनी ने सोमनाथ, कांगड़ा, मथुरा और ज्वालामुखी के मंदिरों को नष्ट कर के “मूर्ति तोड़” के रूप में नाम कमाना चाहा. यद्यपि भारत पर गजनवी के आक्रमणों का कोई गहरा राजनीतिक असर नहीं है. इन आक्रमणों ने राजपूत राजाओं की युद्ध रणनितियों की कमियों के बारे में खुलासा कर दिया. इससे एक खुलासा और हुआ कि भारत में राजनीतिक एकरूपता नहीं थी और इस बात ने भविष्य में ज्यादा हमलों को बुलावा दिया.

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